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संविधान सभा का गठन : एवं संरचना Constituent Assembly: Formation and Composition

1. प्रस्तावना

भारतीय संविधान भारत के शासन, राजनीतिक संस्थाओं, नागरिकों के अधिकारों और राज्य के दायित्वों का मूल आधार है। इस संविधान का निर्माण संविधान सभा ने किया था। संविधान सभा एक ऐसी प्रतिनिधि संस्था थी, जिसने स्वतंत्र भारत के लिए शासन की संवैधानिक व्यवस्था निर्धारित की।

संविधान निर्माण केवल कानूनी प्रावधानों को एक दस्तावेज में संकलित करने की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि इसमें भारत की विविधता, स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों, सामाजिक न्याय, लोकतंत्र, समानता और राष्ट्रीय एकता से जुड़े प्रश्नों पर भी विचार किया गया।

संविधान सभा ने विभिन्न समितियों, बहसों, संशोधनों और विचार-विमर्श के माध्यम से संविधान का निर्माण किया। इसकी कार्यवाही ने भारत में संसदीय लोकतंत्र तथा संवैधानिक शासन की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2. संविधान सभा की अवधारणा

संविधान सभा ऐसी प्रतिनिधि संस्था होती है जिसे किसी देश के संविधान का निर्माण करने के उद्देश्य से गठित किया जाता है। इसका प्रमुख कार्य शासन की संरचना, विधायिका और कार्यपालिका की शक्तियाँ, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, नागरिकों के अधिकार तथा केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों के नियम निर्धारित करना होता है।

भारत में संविधान सभा की मांग राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान विकसित हुई। भारतीय नेताओं का विचार था कि भारत का संविधान भारतीय जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में भारतीय प्रतिनिधियों की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि देश की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझते हुए शासन की व्यवस्था तैयार करनी थी।

3. संविधान सभा की मांग का ऐतिहासिक विकास

भारतीय संविधान सभा का विचार अचानक उत्पन्न नहीं हुआ। इसके पीछे राष्ट्रीय आंदोलन, स्वशासन की मांग और संवैधानिक सुधारों का लंबा इतिहास था।

एम. एन. रॉय का योगदान: 1934 में एम. एन. रॉय ने भारत के लिए संविधान सभा के विचार को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। उन्हें भारत में संविधान सभा की मांग के प्रारंभिक प्रमुख समर्थकों में गिना जाता है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की भूमिका: कांग्रेस ने 1930 के दशक में इस मांग को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाया। उसका तर्क था कि भारत का संविधान बाहरी शासन द्वारा थोपा नहीं जाना चाहिए, बल्कि भारतीयों को स्वयं अपने संविधान का निर्माण करने का अवसर मिलना चाहिए।

अगस्त प्रस्ताव, 1940: ब्रिटिश सरकार ने अगस्त प्रस्ताव के माध्यम से यह स्वीकार किया कि भारतीयों को अपने संविधान के निर्माण में भूमिका मिलेगी। हालांकि, तत्कालीन प्रस्ताव भारतीयों की पूर्ण स्वतंत्र संविधान सभा की मांग को पूरी तरह संतुष्ट नहीं करता था।

क्रिप्स मिशन, 1942: क्रिप्स मिशन ने युद्ध के बाद संविधान निर्माण की प्रक्रिया से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया। भारतीय नेताओं ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। इसके बावजूद इसने संविधान सभा के गठन के प्रश्न को आगे बढ़ाया।

कैबिनेट मिशन योजना, 1946: संविधान सभा के गठन का वास्तविक आधार कैबिनेट मिशन योजना बनी। इसी योजना के अंतर्गत संविधान सभा के सदस्यों के चयन की व्यवस्था निर्धारित की गई।

4. संविधान सभा का गठन

कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के अनुसार संविधान सभा का गठन किया गया। इसके सदस्य प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर सीधे जनता द्वारा निर्वाचित नहीं हुए थे। प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों ने संविधान सभा के प्रतिनिधियों का चुनाव किया। देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के चयन की व्यवस्था अलग थी।

संविधान सभा की प्रारंभिक निर्धारित सदस्य संख्या 389 थी। इसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांतों, मुख्य आयुक्त प्रांतों और देशी रियासतों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना था।

प्रारंभिक व्यवस्था के अनुसार:

  • ब्रिटिश भारतीय प्रांतों के लिए 292 सीटें निर्धारित थीं।
  • मुख्य आयुक्त प्रांतों के लिए 4 सीटें निर्धारित थीं।
  • देशी रियासतों के लिए 93 सीटें निर्धारित थीं।

इस प्रकार प्रारंभिक कुल सदस्य संख्या 389 थी।

5. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन

ब्रिटिश भारतीय प्रांतों के प्रतिनिधियों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया गया। निर्वाचन में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली तथा एकल संक्रमणीय मत पद्धति का उपयोग किया गया।

यह व्यवस्था संविधान सभा में विभिन्न समुदायों और राजनीतिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से बनाई गई थी। हालांकि, यह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित प्रत्यक्ष चुनाव नहीं था।

देशी रियासतों के प्रतिनिधियों को संबंधित रियासतों की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नामित या चुना जाना था। इस कारण संविधान सभा की प्रतिनिधित्व व्यवस्था ब्रिटिश भारतीय प्रांतों और देशी रियासतों में समान नहीं थी।

6. संविधान सभा की पहली बैठक

संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली में हुई। डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया, क्योंकि वे उस समय सभा के वरिष्ठतम सदस्यों में से एक थे।

11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित हुए। एच. सी. मुखर्जी उपाध्यक्ष चुने गए।

संविधान सभा की पहली बैठक में मुस्लिम लीग के अधिकांश सदस्य शामिल नहीं हुए थे। विभाजन की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण संविधान सभा की संरचना और कार्यक्षेत्र में बाद में परिवर्तन हुए।

7. उद्देश्य प्रस्ताव

13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव में स्वतंत्र भारत की संवैधानिक व्यवस्था के मूल आदर्शों को अभिव्यक्त किया गया।

इसमें भारत को स्वतंत्र और संप्रभु इकाई के रूप में स्थापित करने, जनता को सत्ता का स्रोत मानने, न्याय और समानता सुनिश्चित करने तथा अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा जैसे विचार शामिल थे।

संविधान सभा ने 22 जनवरी 1947 को उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकार किया। यही प्रस्ताव आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना के मूल विचारों का प्रमुख आधार बना।

उद्देश्य प्रस्ताव का महत्व इस बात में है कि उसने संविधान निर्माण को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित न रखकर लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक परिवर्तन के व्यापक लक्ष्य से जोड़ा।

8. विभाजन के बाद संविधान सभा की संरचना

भारत के विभाजन और पाकिस्तान के गठन के बाद संविधान सभा की सदस्य संख्या में परिवर्तन हुआ। पाकिस्तान के लिए निर्धारित क्षेत्रों के प्रतिनिधि भारतीय संविधान सभा का हिस्सा नहीं रहे।

विभाजन के बाद भारतीय संविधान सभा की सदस्य संख्या 299 रह गई। इसमें 229 सदस्य प्रांतों से और 70 सदस्य देशी रियासतों से थे।

इस परिवर्तन ने संविधान सभा के प्रतिनिधित्व और कार्यक्षेत्र को प्रभावित किया, लेकिन संविधान निर्माण की प्रक्रिया जारी रही।

9. प्रारूप समिति का गठन

संविधान सभा ने विभिन्न विषयों पर विचार करने के लिए अनेक समितियाँ बनाई थीं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण समितियों में से एक प्रारूप समिति थी।

प्रारूप समिति का गठन 29 अगस्त 1947 को हुआ। इसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर थे। समिति का मुख्य कार्य संविधान के मसौदे को तैयार करना और विभिन्न समितियों के निर्णयों तथा संविधान सभा के विचार-विमर्श को व्यवस्थित संवैधानिक रूप देना था।

प्रारूप समिति के मूल सात सदस्य थे:

  1. डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर — अध्यक्ष
  2. एन. गोपालस्वामी आयंगार
  3. अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर
  4. के. एम. मुंशी
  5. सैयद मोहम्मद सादुल्ला
  6. बी. एल. मित्तर
  7. डी. पी. खेतान

बाद में सदस्यों में परिवर्तन हुआ। बी. एल. मित्तर के स्थान पर एन. माधव राव और डी. पी. खेतान के निधन के बाद टी. टी. कृष्णमाचारी समिति से जुड़े।

डॉ. आंबेडकर ने प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में संविधान के मसौदे को व्यवस्थित करने और सभा के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संविधान निर्माण में अन्य सदस्यों, समितियों, विशेषज्ञों और संविधान सभा के सभी प्रतिनिधियों का भी योगदान था।

10. संविधान सभा की प्रमुख समितियाँ

संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा ने अनेक समितियाँ बनाई थीं। प्रत्येक समिति को एक विशिष्ट विषय पर विचार करने और सुझाव प्रस्तुत करने का दायित्व दिया गया।

प्रमुख समितियाँ और उनके अध्यक्ष:

  • प्रारूप समिति — डॉ. बी. आर. आंबेडकर
  • संघ शक्ति समिति — जवाहरलाल नेहरू
  • संघ संविधान समिति — जवाहरलाल नेहरू
  • प्रांतीय संविधान समिति — सरदार वल्लभभाई पटेल
  • मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यक तथा जनजातीय एवं बहिष्कृत क्षेत्रों से संबंधित सलाहकार समिति — सरदार वल्लभभाई पटेल
  • मौलिक अधिकार उपसमिति — जे. बी. कृपलानी
  • अल्पसंख्यक उपसमिति — एच. सी. मुखर्जी
  • प्रक्रिया नियम समिति — डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • संचालन समिति — डॉ. राजेंद्र प्रसाद

इन समितियों ने संघीय व्यवस्था, प्रांतीय शासन, मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों के संरक्षण, जनजातीय क्षेत्रों और संविधान के प्रारूप जैसे विषयों पर काम किया।

11. संविधान सभा में विचार-विमर्श

संविधान सभा ने संविधान के विभिन्न प्रावधानों पर व्यापक बहस की। सदस्यों ने शासन की प्रकृति, केंद्र और राज्यों के संबंध, न्यायपालिका, नागरिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों के अधिकार, सामाजिक समानता और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे।

संविधान निर्माण के दौरान कई विषयों पर मतभेद भी सामने आए। इन मतभेदों का समाधान बहस, संशोधनों और मतदान के माध्यम से किया गया। इस प्रक्रिया ने संविधान को व्यापक विचार-विमर्श पर आधारित दस्तावेज बनाने में सहायता की।

संविधान सभा की कार्यवाही से स्पष्ट होता है कि संविधान निर्माण में विभिन्न दृष्टिकोणों को सुना गया और अनेक विषयों पर समझौते तथा सहमति विकसित की गई।

12. संविधान निर्माण में लगा समय

संविधान सभा ने लगभग 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन में संविधान निर्माण का कार्य पूरा किया।

संविधान का प्रारूप सभा के सामने प्रस्तुत किए जाने के बाद उस पर चर्चा हुई और अनेक संशोधन प्रस्तावित किए गए। संविधान सभा ने संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया।

इसके बाद संविधान के अधिकांश प्रावधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुए। इसी दिन भारत एक गणराज्य बना। 26 जनवरी की तारीख का चयन 1930 के पूर्ण स्वराज दिवस की ऐतिहासिक स्मृति से भी जुड़ा था।

13. संविधान सभा का संवैधानिक महत्व

संविधान सभा का महत्व अनेक कारणों से है।

पहला, इसने भारत के लिए लिखित संविधान तैयार किया, जो शासन की संस्थाओं और उनकी शक्तियों को निर्धारित करता है।

दूसरा, इसने लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता जैसे मूल्यों को संवैधानिक ढाँचे में स्थान दिया।

तीसरा, इसने विविध भाषाओं, धर्मों, क्षेत्रों और सामाजिक समूहों वाले देश के लिए एक साझा संवैधानिक व्यवस्था बनाने का प्रयास किया।

चौथा, संविधान सभा की बहसों और समितियों ने यह सुनिश्चित करने में योगदान दिया कि संविधान निर्माण केवल कुछ व्यक्तियों का कार्य न रहकर एक व्यापक प्रतिनिधि प्रक्रिया बने।

हालाँकि, इसकी सदस्यता प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से नहीं चुनी गई थी। इसलिए इसकी प्रतिनिधिक प्रकृति का मूल्यांकन करते समय उस समय की ऐतिहासिक परिस्थितियों और निर्वाचन व्यवस्था दोनों को ध्यान में रखना चाहिए।

14. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • संविधान सभा की प्रारंभिक निर्धारित सदस्य संख्या — 389
  • विभाजन के बाद सदस्य संख्या — 299
  • पहली बैठक — 9 दिसंबर 1946
  • अस्थायी अध्यक्ष — डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
  • स्थायी अध्यक्ष — डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत — 13 दिसंबर 1946
  • उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकृत — 22 जनवरी 1947
  • प्रारूप समिति का गठन — 29 अगस्त 1947
  • प्रारूप समिति के अध्यक्ष — डॉ. बी. आर. आंबेडकर
  • संविधान अंगीकृत — 26 नवंबर 1949
  • संविधान लागू — 26 जनवरी 1950
  • संविधान निर्माण में लगा समय — 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन

अभ्यास प्रश्नावली — UPSC/UPPCS स्तर

कुल 20 कठिन प्रश्न

प्रश्न 1. संविधान सभा के गठन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के अंतर्गत हुआ।
  2. इसके सभी सदस्य प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित हुए थे।
  3. प्रांतीय प्रतिनिधियों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया गया।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1 और 3
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (B) केवल 1 और 3।

व्याख्या: संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत हुआ। प्रांतीय प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों ने किया था। यह प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित चुनाव नहीं था।

प्रश्न 2. संविधान सभा की प्रारंभिक सदस्य संख्या 389 निर्धारित किए जाने के संबंध में कौन-सा विकल्प सही है?

(A) 292 प्रांत, 4 मुख्य आयुक्त प्रांत और 93 देशी रियासतें
(B) 299 प्रांत, 70 देशी रियासतें और 20 मुख्य आयुक्त प्रांत
(C) 250 प्रांत, 100 देशी रियासतें और 39 मुख्य आयुक्त प्रांत
(D) 300 प्रांत, 89 देशी रियासतें और कोई मुख्य आयुक्त प्रांत नहीं

सही उत्तर: (A) 292 प्रांत, 4 मुख्य आयुक्त प्रांत और 93 देशी रियासतें।

व्याख्या: कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत प्रारंभिक निर्धारित सदस्य संख्या 389 थी। इसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांतों, मुख्य आयुक्त प्रांतों और देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग सीटें निर्धारित थीं।

प्रश्न 3. संविधान सभा की पहली बैठक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई।
  2. डॉ. राजेंद्र प्रसाद पहली बैठक में ही स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
  3. डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष थे।

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1
(B) केवल 1 और 3
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (B) केवल 1 और 3।

व्याख्या: संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी और डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद 11 दिसंबर 1946 को स्थायी अध्यक्ष चुने गए।

प्रश्न 4. उद्देश्य प्रस्ताव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. इसे जवाहरलाल नेहरू ने प्रस्तुत किया।
  2. इसे 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया।
  3. इसने संविधान की प्रस्तावना के मूल आदर्शों को प्रभावित किया।

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (D) 1, 2 और 3।

व्याख्या: जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। इसे 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया और इसके विचारों ने संविधान की प्रस्तावना को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।

प्रश्न 5. विभाजन के बाद भारतीय संविधान सभा की सदस्य संख्या कितनी रह गई थी?

(A) 389
(B) 324
(C) 299
(D) 284

सही उत्तर: (C) 299।

व्याख्या: विभाजन के बाद भारतीय संविधान सभा की सदस्य संख्या 299 रह गई थी। इनमें 229 सदस्य प्रांतों से और 70 सदस्य देशी रियासतों से थे।

प्रश्न 6. प्रारूप समिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. इसका गठन 29 अगस्त 1947 को हुआ।
  2. इसके अध्यक्ष डॉ. बी. आर. आंबेडकर थे।
  3. इसका एकमात्र कार्य संविधान सभा की बैठकों का संचालन करना था।

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (A) केवल 1 और 2।

व्याख्या: प्रारूप समिति का गठन 29 अगस्त 1947 को हुआ था। इसका कार्य संविधान के मसौदे को तैयार करना और विभिन्न समितियों के निर्णयों तथा सभा की चर्चाओं को संवैधानिक प्रारूप देना था। बैठकों का संचालन इसका मुख्य कार्य नहीं था।

प्रश्न 7. निम्नलिखित में से किसका प्रारूप समिति के मूल सात सदस्यों में समावेश था?

(A) जवाहरलाल नेहरू
(B) सरदार वल्लभभाई पटेल
(C) के. एम. मुंशी
(D) महात्मा गांधी

सही उत्तर: (C) के. एम. मुंशी।

व्याख्या: के. एम. मुंशी प्रारूप समिति के मूल सात सदस्यों में शामिल थे। जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल ने अन्य महत्वपूर्ण समितियों में भूमिका निभाई, जबकि महात्मा गांधी संविधान सभा के सदस्य नहीं थे।

प्रश्न 8. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए।

  1. प्रारूप समिति — डॉ. बी. आर. आंबेडकर
  2. प्रांतीय संविधान समिति — सरदार वल्लभभाई पटेल
  3. संघ शक्ति समिति — जवाहरलाल नेहरू
  4. प्रक्रिया नियम समिति — डॉ. राजेंद्र प्रसाद

उपर्युक्त में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4

सही उत्तर: (D) 1, 2, 3 और 4।

व्याख्या: चारों युग्म सही हैं। संविधान सभा की समितियों ने संविधान के अलग-अलग विषयों पर कार्य किया और उनके सुझावों ने अंतिम प्रारूप तैयार करने में योगदान दिया।

प्रश्न 9. संविधान सभा में प्रतिनिधित्व की व्यवस्था के संबंध में सही कथन कौन-सा है?

(A) सभी सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने गए थे।
(B) प्रांतीय प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों ने किया।
(C) देशी रियासतों के प्रतिनिधि भी अनिवार्य रूप से प्रत्यक्ष चुनाव से चुने गए।
(D) संविधान सभा में केवल ब्रिटिश प्रांतों के प्रतिनिधि थे।

सही उत्तर: (B) प्रांतीय प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों ने किया।

व्याख्या: संविधान सभा के गठन में प्रांतीय विधानसभाओं और देशी रियासतों के लिए अलग-अलग प्रतिनिधित्व व्यवस्थाएँ थीं। यह प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित चुनाव नहीं था।

प्रश्न 10. संविधान को अंगीकृत करने और लागू करने की तिथियों के संबंध में सही विकल्प चुनिए।

(A) अंगीकृत: 15 अगस्त 1947; लागू: 9 दिसंबर 1946
(B) अंगीकृत: 26 जनवरी 1950; लागू: 26 नवंबर 1949
(C) अंगीकृत: 26 नवंबर 1949; लागू: 26 जनवरी 1950
(D) अंगीकृत: 22 जनवरी 1947; लागू: 15 अगस्त 1947

सही उत्तर: (C) अंगीकृत: 26 नवंबर 1949; लागू: 26 जनवरी 1950।

व्याख्या: संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान अंगीकृत किया। इसके अधिकांश प्रावधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुए, जिस दिन भारत गणराज्य बना।

प्रश्न 11. कथन और कारण पर विचार कीजिए।

कथन (A): संविधान सभा की प्रतिनिधिक प्रकृति का मूल्यांकन करते समय उसकी निर्वाचन व्यवस्था को ध्यान में रखना चाहिए।

कारण (R): संविधान सभा के सभी सदस्य प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से निर्वाचित नहीं हुए थे।

(A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(C) A सही है, R गलत है।
(D) A गलत है, R सही है।

सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

व्याख्या: संविधान सभा की प्रतिनिधिक प्रकृति को समझने के लिए उसके गठन की ऐतिहासिक परिस्थितियों और चुनाव की पद्धति दोनों को देखना आवश्यक है। प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का अभाव इस मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

प्रश्न 12. निम्नलिखित घटनाओं को सही कालक्रम में व्यवस्थित कीजिए।

  1. प्रारूप समिति का गठन
  2. उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाना
  3. संविधान सभा की पहली बैठक
  4. संविधान का अंगीकरण

(A) 3, 2, 1, 4
(B) 2, 3, 1, 4
(C) 3, 1, 2, 4
(D) 1, 3, 2, 4

सही उत्तर: (A) 3, 2, 1, 4।

व्याख्या: पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई, उद्देश्य प्रस्ताव 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत किया गया, प्रारूप समिति 29 अगस्त 1947 को गठित हुई और संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत हुआ।

प्रश्न 13. संविधान निर्माण की प्रक्रिया के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. संविधान निर्माण में अनेक विषयगत समितियों ने योगदान दिया।
  2. प्रारूप समिति ने संविधान के मसौदे को व्यवस्थित रूप दिया।
  3. संविधान सभा में किसी भी प्रावधान पर बहस या संशोधन नहीं हुआ।

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1
(B) केवल 1 और 2
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (B) केवल 1 और 2।

व्याख्या: संविधान सभा में अनेक समितियाँ कार्यरत थीं। मसौदे पर बहस हुई और संशोधन प्रस्तावित किए गए। इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 14. संविधान सभा के संवैधानिक महत्व का सबसे उपयुक्त वर्णन कौन-सा है?

(A) इसने केवल ब्रिटिश शासन के प्रशासनिक नियमों को संकलित किया।
(B) इसने केवल न्यायपालिका की संरचना निर्धारित की।
(C) इसने लोकतंत्र, अधिकारों, शासन की संस्थाओं और राज्य के दायित्वों के लिए संवैधानिक ढाँचा तैयार किया।
(D) इसका कार्य केवल स्वतंत्रता की तिथि निर्धारित करना था।

सही उत्तर: (C) इसने लोकतंत्र, अधिकारों, शासन की संस्थाओं और राज्य के दायित्वों के लिए संवैधानिक ढाँचा तैयार किया।

व्याख्या: संविधान सभा का कार्य व्यापक था। उसने शासन की संरचना, नागरिक अधिकारों, संस्थागत शक्तियों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संवैधानिक आधार तैयार किया।

प्रश्न 15. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उद्देश्य प्रस्ताव और प्रस्तावना के संबंध को सबसे अच्छी तरह व्यक्त करता है?

(A) उद्देश्य प्रस्ताव संविधान लागू होने के बाद बनाया गया था।
(B) उद्देश्य प्रस्ताव ने संविधान के मूल आदर्शों को व्यक्त किया और प्रस्तावना के विकास को प्रभावित किया।
(C) उद्देश्य प्रस्ताव केवल निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या निर्धारित करता था।
(D) उद्देश्य प्रस्ताव प्रारूप समिति के गठन के बाद प्रस्तुत किया गया था।

सही उत्तर: (B) उद्देश्य प्रस्ताव ने संविधान के मूल आदर्शों को व्यक्त किया और प्रस्तावना के विकास को प्रभावित किया।

व्याख्या: उद्देश्य प्रस्ताव ने स्वतंत्रता, संप्रभुता, न्याय और समानता जैसे मूल विचारों को व्यक्त किया। इन विचारों का प्रभाव संविधान की प्रस्तावना पर पड़ा।

प्रश्न 16. गद्यांश पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।

संविधान सभा ने संविधान निर्माण के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया। कुछ समितियों ने संघीय व्यवस्था और प्रांतीय शासन पर विचार किया, जबकि अन्य ने मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों और जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े प्रश्नों का अध्ययन किया। इन समितियों के सुझावों को व्यापक विचार-विमर्श के माध्यम से संविधान निर्माण की प्रक्रिया में शामिल किया गया।

इस गद्यांश से कौन-सा निष्कर्ष सबसे अधिक उपयुक्त है?

(A) संविधान निर्माण का कार्य केवल एक समिति ने किया।
(B) संविधान सभा ने विषय-विशेष के अध्ययन और सामूहिक विचार-विमर्श का सहारा लिया।
(C) संविधान सभा में समितियों की कोई भूमिका नहीं थी।
(D) सभी समितियों का कार्य केवल संविधान लागू होने के बाद शुरू हुआ।

सही उत्तर: (B) संविधान सभा ने विषय-विशेष के अध्ययन और सामूहिक विचार-विमर्श का सहारा लिया।

व्याख्या: गद्यांश स्पष्ट करता है कि संविधान सभा ने अलग-अलग विषयों के लिए समितियाँ बनाईं और उनके सुझावों पर विचार करके संविधान निर्माण किया।

प्रश्न 17. कथन और कारण पर विचार कीजिए।

कथन (A): विभाजन के बाद भारतीय संविधान सभा की सदस्य संख्या में परिवर्तन हुआ।

कारण (R): पाकिस्तान के लिए निर्धारित क्षेत्रों के प्रतिनिधि भारतीय संविधान सभा का हिस्सा नहीं रहे।

(A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(C) A सही है, R गलत है।
(D) A गलत है, R सही है।

सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

व्याख्या: विभाजन के कारण संविधान सभा की संरचना बदली और भारतीय संविधान सभा की सदस्य संख्या 389 से घटकर 299 रह गई।

प्रश्न 18. संविधान सभा के समय और कार्य की अवधि के संबंध में सही विकल्प चुनिए।

(A) संविधान निर्माण में 1 वर्ष, 6 महीने और 10 दिन लगे।
(B) संविधान निर्माण में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे।
(C) संविधान निर्माण में 5 वर्ष लगे।
(D) संविधान निर्माण में 10 वर्ष लगे।

सही उत्तर: (B) संविधान निर्माण में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे।

व्याख्या: संविधान सभा ने लगभग 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन में संविधान निर्माण का कार्य पूरा किया। संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया।

प्रश्न 19. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म गलत सुमेलित है?

(A) डॉ. राजेंद्र प्रसाद — संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष
(B) डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा — संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष
(C) डॉ. बी. आर. आंबेडकर — प्रारूप समिति के अध्यक्ष
(D) जवाहरलाल नेहरू — प्रारूप समिति के अध्यक्ष

सही उत्तर: (D) जवाहरलाल नेहरू — प्रारूप समिति के अध्यक्ष।

व्याख्या: प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी. आर. आंबेडकर थे। जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया और संघ शक्ति समिति तथा संघ संविधान समिति जैसी समितियों में प्रमुख भूमिका निभाई।

प्रश्न 20. संविधान सभा के गठन और कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत हुआ।
  2. संविधान सभा ने संविधान निर्माण के लिए विषयगत समितियों का उपयोग किया।
  3. संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया।
  4. संविधान सभा के सभी सदस्य प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित हुए थे।

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1 और 4
(B) केवल 1, 2 और 3
(C) केवल 2, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4

सही उत्तर: (B) केवल 1, 2 और 3।

व्याख्या: पहले तीन कथन सही हैं। चौथा कथन गलत है, क्योंकि संविधान सभा के सदस्य प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित नहीं हुए थे।


अध्याय का निष्कर्ष

भारतीय संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के लिए संवैधानिक शासन की नींव रखी। इसके गठन से लेकर संविधान के अंगीकरण तक की प्रक्रिया में समितियों, बहसों, संशोधनों और सामूहिक विचार-विमर्श की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संविधान सभा का अध्ययन भारतीय लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और आधुनिक भारतीय राज्य की संस्थागत संरचना को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है।

अध्ययन सुझाव: UPSC और UPPCS की तैयारी के लिए संविधान सभा की तिथियों, प्रमुख सदस्यों, समितियों के अध्यक्षों, उद्देश्य प्रस्ताव, प्रारूप समिति तथा संविधान के अंगीकरण और लागू होने की तिथियों को विशेष रूप से याद करें।

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