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भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ (Salient Features of the Indian Constitution)

1. प्रस्तावना

भारतीय संविधान देश की सर्वोच्च विधि है। यह भारत की शासन व्यवस्था, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, नागरिकों के अधिकारों तथा केंद्र और राज्यों के संबंधों को निर्धारित करता है। भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा ने किया और इसे 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया। इसके अधिकांश प्रावधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुए।

भारतीय संविधान अनेक संवैधानिक परंपराओं और विभिन्न देशों की शासन प्रणालियों से प्रभावित है, लेकिन इसमें भारतीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार विशिष्ट प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। इसकी प्रमुख विशेषताएँ लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, संघीय व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका और संवैधानिक सर्वोच्चता को मजबूत करती हैं।

2. लिखित एवं विस्तृत संविधान

भारतीय संविधान एक लिखित संविधान है। इसमें शासन की संस्थाओं, उनकी शक्तियों, नागरिकों के अधिकारों तथा केंद्र और राज्यों के संबंधों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

संविधान में विस्तृत प्रावधान होने का एक कारण भारत की सामाजिक, भाषाई, धार्मिक और क्षेत्रीय विविधता है। संविधान निर्माताओं ने शासन व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करने का प्रयास किया, ताकि प्रशासनिक और संवैधानिक कार्यों के संचालन के लिए एक व्यवस्थित आधार उपलब्ध हो।

3. संविधान की सर्वोच्चता

भारत में संविधान सर्वोच्च विधि है। संसद, राज्य विधानमंडल, कार्यपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाएँ अपनी शक्तियों का प्रयोग संविधान के अनुसार करती हैं।

संसद कानून बना सकती है, लेकिन उसका कानून संविधान के अनुरूप होना चाहिए। यदि कोई कानून संविधान के विरुद्ध पाया जाता है, तो न्यायपालिका संवैधानिक समीक्षा के माध्यम से उसे असंवैधानिक घोषित कर सकती है।

इस प्रकार संविधान की सर्वोच्चता मनमानी शासन व्यवस्था को सीमित करती है और संवैधानिक शासन को सुनिश्चित करती है।

4. संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य

भारतीय संविधान की उद्देशिका भारत को सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य घोषित करती है।

सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न: भारत आंतरिक और बाहरी मामलों में स्वतंत्र निर्णय लेने वाला राष्ट्र है।

समाजवादी: राज्य सामाजिक और आर्थिक न्याय तथा अवसरों की समानता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

पंथनिरपेक्ष: राज्य किसी एक धर्म को अपना आधिकारिक धर्म घोषित करके नागरिकों के साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव नहीं करता।

लोकतंत्रात्मक: जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है।

गणराज्य: भारत का राष्ट्राध्यक्ष वंशानुगत राजतंत्र के आधार पर पद प्राप्त नहीं करता। भारत में राष्ट्रपति संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार निर्वाचित होते हैं।

समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा उद्देशिका में जोड़े गए।

5. संसदीय शासन प्रणाली

भारत में संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है। इसमें राष्ट्रपति संवैधानिक राष्ट्राध्यक्ष हैं, जबकि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद केंद्र सरकार का संचालन करती है।

संसदीय प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  • प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद।
  • मंत्रिपरिषद की लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व की व्यवस्था।
  • विधायिका और कार्यपालिका के बीच निकट संबंध।
  • सरकार का संसद के प्रति उत्तरदायी होना।

राज्यों में भी संसदीय व्यवस्था है, जहाँ राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद शासन संचालन करती है।

6. संघीय व्यवस्था और एकात्मक विशेषताएँ

भारत में संघीय शासन व्यवस्था है। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन किया गया है। संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची का प्रावधान है।

संघ सूची: इसमें राष्ट्रीय महत्व के विषय आते हैं, जैसे रक्षा, विदेश मामले और मुद्रा।

राज्य सूची: इसमें सामान्यतः राज्य स्तर के विषय आते हैं, जैसे पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था, संविधान में निर्धारित सीमाओं के अधीन।

समवर्ती सूची: इसमें ऐसे विषय शामिल हैं जिन पर संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं, जैसे शिक्षा और वन।

भारत की संघीय व्यवस्था में कुछ एकात्मक विशेषताएँ भी हैं। उदाहरण के लिए, आपातकालीन प्रावधान, एकल नागरिकता, एकीकृत न्यायपालिका और केंद्र की कुछ विशेष शक्तियाँ।

इसलिए भारतीय संविधान को प्रायः संघीय व्यवस्था वाला संविधान कहा जाता है, जिसमें मजबूत केंद्र और एकात्मक विशेषताओं का समावेश है।

7. शक्तियों का विभाजन

भारतीय शासन व्यवस्था में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के कार्य अलग-अलग निर्धारित हैं।

विधायिका: कानून बनाती है और सरकार के कार्यों पर निगरानी रखती है।

कार्यपालिका: कानूनों और नीतियों को लागू करती है तथा प्रशासन चलाती है।

न्यायपालिका: कानूनों की व्याख्या करती है और विवादों का निर्णय करती है।

भारत में इन संस्थाओं के बीच पूर्ण पृथक्करण के बजाय शक्तियों का संवैधानिक विभाजन और नियंत्रण एवं संतुलन की व्यवस्था है। इससे किसी एक संस्था में अनियंत्रित शक्ति के केंद्रीकरण को रोकने में सहायता मिलती है।

8. मौलिक अधिकार

भारतीय संविधान के भाग III में अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों का प्रावधान है। ये नागरिक स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वर्तमान में प्रमुख मौलिक अधिकारों की छह श्रेणियाँ हैं:

  1. समानता का अधिकार — अनुच्छेद 14 से 18।
  2. स्वतंत्रता का अधिकार — अनुच्छेद 19 से 22, संबंधित संवैधानिक प्रावधानों सहित।
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार — अनुच्छेद 23 से 24।
  4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार — अनुच्छेद 25 से 28।
  5. सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार — अनुच्छेद 29 से 30।
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार — अनुच्छेद 32।

मौलिक अधिकार पूर्णतः असीमित नहीं हैं। संविधान के अनुसार कुछ अधिकारों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इनके उल्लंघन पर व्यक्ति निर्धारित परिस्थितियों में न्यायालय की शरण ले सकता है।

9. राज्य के नीति-निदेशक तत्व

राज्य के नीति-निदेशक तत्व संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक दिए गए हैं। इनका उद्देश्य भारत में सामाजिक और आर्थिक न्याय पर आधारित कल्याणकारी राज्य की स्थापना में मार्गदर्शन देना है।

इनमें जनकल्याण, समान अवसर, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्राम पंचायतों का संगठन, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय शांति जैसे विषय शामिल हैं।

अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति-निदेशक तत्व न्यायालय द्वारा सामान्यतः सीधे लागू नहीं कराए जा सकते, लेकिन वे देश के शासन में मूलभूत हैं और कानून निर्माण में राज्य का मार्गदर्शन करते हैं।

10. मौलिक कर्तव्य

मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग IVA में अनुच्छेद 51A के अंतर्गत दिए गए हैं। इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था। प्रारंभ में दस मौलिक कर्तव्य थे। 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा एक और कर्तव्य जोड़ा गया। वर्तमान में कुल 11 मौलिक कर्तव्य हैं।

इनमें संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना, देश की एकता और अखंडता की रक्षा करना, पर्यावरण की रक्षा करना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना शामिल है।

मौलिक कर्तव्य नागरिकों को यह याद दिलाते हैं कि अधिकारों के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियाँ भी महत्वपूर्ण हैं।

11. स्वतंत्र एवं एकीकृत न्यायपालिका

भारतीय संविधान स्वतंत्र न्यायपालिका की व्यवस्था करता है। सर्वोच्च न्यायालय देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। इसके नीचे उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय कार्य करते हैं।

एकीकृत न्यायपालिका का अर्थ है कि भारत में न्यायिक व्यवस्था एक समन्वित संरचना में कार्य करती है। सर्वोच्च न्यायालय संवैधानिक प्रश्नों पर निर्णय देता है और उच्च न्यायालयों तथा अधीनस्थ न्यायालयों के साथ न्यायिक व्यवस्था का संचालन करता है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की रक्षा, नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण और कानून के शासन के लिए आवश्यक है।

12. न्यायिक समीक्षा

न्यायिक समीक्षा के माध्यम से न्यायालय यह जाँच सकते हैं कि कोई कानून या सरकारी कार्रवाई संविधान के अनुरूप है या नहीं।

यदि कोई कानून संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो सक्षम न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है। न्यायिक समीक्षा संविधान की सर्वोच्चता और मौलिक अधिकारों के संरक्षण का महत्वपूर्ण साधन है।

अनुच्छेद 13, 32 और 226 सहित विभिन्न संवैधानिक प्रावधान न्यायिक समीक्षा और संवैधानिक उपचारों की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

13. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार

भारत में निर्धारित संवैधानिक शर्तों के अधीन 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के भारतीय नागरिकों को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव में मतदाता बनने का अधिकार प्राप्त है।

61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई। यह परिवर्तन 1989 में प्रभावी हुआ।

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लोकतंत्र को व्यापक जनाधार प्रदान करता है और नागरिकों को सरकार के गठन में भाग लेने का अवसर देता है।

14. एकल नागरिकता

भारत में एकल नागरिकता की व्यवस्था है। भारतीय नागरिकों के पास भारतीय नागरिकता होती है, न कि अलग-अलग भारतीय राज्यों की स्वतंत्र राज्य नागरिकता।

एकल नागरिकता का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और देशभर में नागरिकों की साझा संवैधानिक पहचान को बढ़ावा देना है।

हालाँकि, नागरिकों के निवास, रोजगार, शिक्षा और अन्य मामलों में संविधान तथा कानून के अंतर्गत कुछ विशेष प्रावधान हो सकते हैं।

15. स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएँ

भारतीय संविधान निष्पक्ष प्रशासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं का प्रावधान करता है।

प्रमुख उदाहरण:

  • निर्वाचन आयोग — चुनावों के संचालन और निगरानी से संबंधित संवैधानिक संस्था।
  • नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक — सरकारी आय और व्यय की लेखा-परीक्षा से संबंधित संस्था।
  • संघ लोक सेवा आयोग — संघ की सेवाओं में भर्ती संबंधी संवैधानिक दायित्व निभाता है।
  • वित्त आयोग — केंद्र और राज्यों के बीच करों के वितरण तथा वित्तीय संबंधों पर सिफारिशें देता है।

इन संस्थाओं का उद्देश्य शासन में निष्पक्षता, जवाबदेही और संस्थागत संतुलन को बढ़ावा देना है।

16. कठोरता और लचीलेपन का समन्वय

भारतीय संविधान न तो पूरी तरह कठोर है और न ही पूरी तरह लचीला। इसके विभिन्न प्रावधानों में संशोधन की अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं।

कुछ प्रावधान संसद के साधारण बहुमत से बदले जा सकते हैं। कुछ के लिए अनुच्छेद 368 के अंतर्गत विशेष बहुमत आवश्यक होता है। कुछ संघीय प्रावधानों में संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों की स्वीकृति भी आवश्यक होती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य संविधान में आवश्यक परिवर्तन की सुविधा देना और साथ ही उसकी स्थिरता तथा संघीय संतुलन की रक्षा करना है।

17. आपातकालीन प्रावधान

भारतीय संविधान में असाधारण परिस्थितियों से निपटने के लिए आपातकालीन प्रावधान दिए गए हैं।

प्रमुख प्रकार:

  1. राष्ट्रीय आपातकाल — अनुच्छेद 352।
  2. राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता से संबंधित राष्ट्रपति शासन — अनुच्छेद 356।
  3. वित्तीय आपातकाल — अनुच्छेद 360।

इन प्रावधानों का उद्देश्य गंभीर संकटों में संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखना है। इनके प्रयोग पर संविधान में निर्धारित शर्तें और प्रक्रियाएँ लागू होती हैं।

18. स्थानीय स्वशासन

स्थानीय स्वशासन लोकतांत्रिक व्यवस्था को गाँवों और नगरों तक पहुँचाता है।

73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक आधार प्रदान किया। 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने नगरपालिकाओं से संबंधित संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत किया।

इन संशोधनों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों की संरचना, चुनाव तथा प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रावधानों को संवैधानिक महत्व मिला।

स्थानीय स्वशासन जनता की भागीदारी, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को बढ़ावा देता है।

19. सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों का संरक्षण

भारतीय संविधान सामाजिक न्याय को महत्वपूर्ण स्थान देता है। अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पात्र वर्गों के लिए संविधान तथा कानूनों में विभिन्न संरक्षण और प्रतिनिधित्व संबंधी व्यवस्थाएँ की गई हैं।

अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है। अनुच्छेद 46 राज्य को अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक तथा आर्थिक हितों को बढ़ावा देने का निर्देश देता है।

इन प्रावधानों का उद्देश्य ऐतिहासिक वंचनाओं को दूर करना, अवसरों की समानता को मजबूत करना और अधिक न्यायपूर्ण समाज की दिशा में आगे बढ़ना है।

20. भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताओं का समग्र महत्व

भारतीय संविधान की विशेषताएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। मौलिक अधिकार नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं, नीति-निदेशक तत्व कल्याणकारी राज्य की दिशा देते हैं और मौलिक कर्तव्य नागरिक जिम्मेदारियों पर बल देते हैं।

संघीय व्यवस्था केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करती है, जबकि स्वतंत्र न्यायपालिका संविधान की सर्वोच्चता की रक्षा करती है। संसदीय शासन प्रणाली सरकार को निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति उत्तरदायी बनाती है और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार नागरिकों को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देता है।

इस प्रकार भारतीय संविधान केवल शासन चलाने का दस्तावेज नहीं है, बल्कि लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय एकता और व्यक्ति की गरिमा को मजबूत करने वाला संवैधानिक आधार भी है।


अभ्यास प्रश्नावली — UPSC/UPPCS स्तर

कुल 20 कठिन प्रश्न

प्रश्न 1. भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. भारत में लिखित संविधान है।
  2. भारत में संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है।
  3. भारत में न्यायपालिका को संविधान की समीक्षा करने की कोई शक्ति नहीं है।

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (A) केवल 1 और 2।

व्याख्या: भारत में लिखित संविधान और संसदीय शासन प्रणाली है। न्यायपालिका को संवैधानिक समीक्षा की शक्ति प्राप्त है, इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 2. भारतीय संविधान की उद्देशिका में “समाजवादी”, “पंथनिरपेक्ष” और “अखंडता” शब्द किस संशोधन द्वारा जोड़े गए?

(A) 24वाँ संशोधन
(B) 42वाँ संशोधन
(C) 44वाँ संशोधन
(D) 61वाँ संशोधन

सही उत्तर: (B) 42वाँ संशोधन।

व्याख्या: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा ये तीनों शब्द उद्देशिका में जोड़े गए।

प्रश्न 3. संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची किस अनुसूची में दी गई हैं?

(A) पाँचवीं अनुसूची
(B) छठी अनुसूची
(C) सातवीं अनुसूची
(D) आठवीं अनुसूची

सही उत्तर: (C) सातवीं अनुसूची।

व्याख्या: संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के माध्यम से केंद्र तथा राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन किया गया है।

प्रश्न 4. कथन और कारण पर विचार कीजिए।

कथन (A): भारतीय संविधान को संघीय विशेषताओं वाला संविधान कहा जाता है।

कारण (R): संविधान केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करता है।

(A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(C) A सही है, R गलत है।
(D) A गलत है, R सही है।

सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

व्याख्या: केंद्र और राज्यों के बीच संवैधानिक शक्तियों का विभाजन संघीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषता है। भारत में मजबूत केंद्र सहित कुछ एकात्मक विशेषताएँ भी हैं।

प्रश्न 5. मौलिक अधिकार संविधान के किस भाग में दिए गए हैं?

(A) भाग II
(B) भाग III
(C) भाग IV
(D) भाग IVA

सही उत्तर: (B) भाग III।

व्याख्या: मौलिक अधिकार संविधान के भाग III में अनुच्छेद 12 से 35 तक दिए गए हैं।

प्रश्न 6. राज्य के नीति-निदेशक तत्वों के संबंध में सही कथन कौन-सा है?

(A) वे संविधान के भाग III में हैं और सभी सीधे न्यायालय में लागू कराए जा सकते हैं।
(B) वे भाग IV में हैं और राज्य की नीतियों के लिए मार्गदर्शन देते हैं।
(C) वे केवल राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित हैं।
(D) उनका सामाजिक और आर्थिक न्याय से कोई संबंध नहीं है।

सही उत्तर: (B) वे भाग IV में हैं और राज्य की नीतियों के लिए मार्गदर्शन देते हैं।

व्याख्या: नीति-निदेशक तत्व संविधान के भाग IV में हैं। अनुच्छेद 37 के अनुसार वे न्यायालय द्वारा सामान्यतः सीधे लागू नहीं कराए जा सकते, लेकिन शासन में मूलभूत हैं।

प्रश्न 7. भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य किस अनुच्छेद के अंतर्गत दिए गए हैं?

(A) अनुच्छेद 32
(B) अनुच्छेद 44
(C) अनुच्छेद 51A
(D) अनुच्छेद 368

सही उत्तर: (C) अनुच्छेद 51A।

व्याख्या: मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग IVA में अनुच्छेद 51A के अंतर्गत दिए गए हैं। वर्तमान में इनकी संख्या 11 है।

प्रश्न 8. मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किस संविधान संशोधन द्वारा की गई?

(A) 42वाँ संशोधन
(B) 44वाँ संशोधन
(C) 52वाँ संशोधन
(D) 61वाँ संशोधन

सही उत्तर: (D) 61वाँ संशोधन।

व्याख्या: 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 ने मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की। यह परिवर्तन 1989 में प्रभावी हुआ।

प्रश्न 9. भारतीय संसदीय शासन प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. राष्ट्रपति भारत के संवैधानिक राष्ट्राध्यक्ष हैं।
  2. केंद्रीय मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।
  3. प्रधानमंत्री का मंत्रिपरिषद के नेतृत्व में महत्वपूर्ण स्थान है।

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1
(B) केवल 1 और 2
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (D) 1, 2 और 3।

व्याख्या: ये तीनों संसदीय शासन प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ हैं। मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।

प्रश्न 10. न्यायिक समीक्षा का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

(A) संसद को सभी न्यायिक मामलों का अंतिम निर्णायक बनाना।
(B) यह जाँचना कि कानून और सरकारी कार्रवाई संविधान के अनुरूप हैं या नहीं।
(C) न्यायपालिका को संविधान से ऊपर रखना।
(D) राज्य विधानमंडलों को समाप्त करना।

सही उत्तर: (B) यह जाँचना कि कानून और सरकारी कार्रवाई संविधान के अनुरूप हैं या नहीं।

व्याख्या: न्यायिक समीक्षा संविधान की सर्वोच्चता और अधिकारों के संरक्षण का साधन है। न्यायालय असंवैधानिक कानूनों या कार्रवाइयों को निर्धारित परिस्थितियों में अमान्य घोषित कर सकते हैं।

प्रश्न 11. कथन और कारण पर विचार कीजिए।

कथन (A): भारत में एकल नागरिकता की व्यवस्था है।

कारण (R): भारतीय नागरिकता राष्ट्रीय स्तर पर साझा नागरिक पहचान प्रदान करती है, न कि अलग-अलग राज्यों की स्वतंत्र राज्य नागरिकता।

(A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(C) A सही है, R गलत है।
(D) A गलत है, R सही है।

सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

व्याख्या: भारत में एकल नागरिकता की व्यवस्था है। यह राष्ट्रीय एकता और साझा संवैधानिक पहचान को बढ़ावा देती है।

प्रश्न 12. संविधान संशोधन की प्रक्रिया के संबंध में सही कथन कौन-सा है?

(A) संविधान के सभी प्रावधान केवल साधारण बहुमत से बदले जा सकते हैं।
(B) संविधान के किसी भी प्रावधान में संशोधन संभव नहीं है।
(C) अलग-अलग प्रावधानों के लिए अलग संशोधन प्रक्रियाएँ हैं; कुछ संघीय प्रावधानों के लिए राज्यों की स्वीकृति भी आवश्यक होती है।
(D) संविधान संशोधन केवल सर्वोच्च न्यायालय कर सकता है।

सही उत्तर: (C) अलग-अलग प्रावधानों के लिए अलग संशोधन प्रक्रियाएँ हैं; कुछ संघीय प्रावधानों के लिए राज्यों की स्वीकृति भी आवश्यक होती है।

व्याख्या: संविधान में कुछ परिवर्तन साधारण बहुमत से, कुछ विशेष बहुमत से और कुछ विशेष बहुमत तथा कम-से-कम आधे राज्यों की स्वीकृति से किए जाते हैं।

प्रश्न 13. राष्ट्रीय आपातकाल, राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल से संबंधित अनुच्छेदों का सही मिलान कीजिए।

  1. राष्ट्रीय आपातकाल — अनुच्छेद 352
  2. राष्ट्रपति शासन — अनुच्छेद 356
  3. वित्तीय आपातकाल — अनुच्छेद 360

(A) केवल 1 सही
(B) केवल 1 और 2 सही
(C) केवल 2 और 3 सही
(D) 1, 2 और 3 सही

सही उत्तर: (D) 1, 2 और 3 सही।

व्याख्या: तीनों अनुच्छेद सही सुमेलित हैं। ये संविधान के आपातकालीन प्रावधानों का हिस्सा हैं।

प्रश्न 14. गद्यांश पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।

भारतीय संविधान केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन करता है। इसके साथ ही कुछ परिस्थितियों में केंद्र को विशेष शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। राष्ट्रीय आपातकाल और अन्य संवैधानिक प्रावधानों के कारण केंद्र की भूमिका बढ़ सकती है।

गद्यांश से कौन-सा निष्कर्ष सबसे उपयुक्त है?

(A) भारत में संघीय व्यवस्था की कोई विशेषता नहीं है।
(B) भारत पूर्णतः राज्यों का परिसंघ है।
(C) भारत में संघीय व्यवस्था के साथ मजबूत केंद्र और कुछ एकात्मक विशेषताएँ भी हैं।
(D) राज्यों को किसी भी विषय पर कानून बनाने का अधिकार नहीं है।

सही उत्तर: (C) भारत में संघीय व्यवस्था के साथ मजबूत केंद्र और कुछ एकात्मक विशेषताएँ भी हैं।

व्याख्या: भारत में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में केंद्र की शक्तियाँ बढ़ जाती हैं। यही इसकी संघीय और एकात्मक विशेषताओं का मिश्रण है।

प्रश्न 15. निम्नलिखित में से कौन-सा संवैधानिक निकाय चुनावों के संचालन और निगरानी से संबंधित है?

(A) वित्त आयोग
(B) निर्वाचन आयोग
(C) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
(D) संघ लोक सेवा आयोग

सही उत्तर: (B) निर्वाचन आयोग।

व्याख्या: निर्वाचन आयोग चुनावों के संचालन और निगरानी से संबंधित संवैधानिक संस्था है। इसका उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को बढ़ावा देना है।

प्रश्न 16. 73वें और 74वें संविधान संशोधन का प्रमुख संबंध किससे है?

(A) मौलिक अधिकारों का विस्तार
(B) सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना
(C) स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक व्यवस्था
(D) मतदान की आयु में परिवर्तन

सही उत्तर: (C) स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक व्यवस्था।

व्याख्या: 73वाँ संशोधन पंचायती राज संस्थाओं और 74वाँ संशोधन नगरपालिकाओं से संबंधित है। इन संशोधनों ने स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक आधार प्रदान किया।

प्रश्न 17. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म गलत सुमेलित है?

(A) अनुच्छेद 14 — कानून के समक्ष समानता
(B) अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता का उन्मूलन
(C) अनुच्छेद 32 — संवैधानिक उपचारों का अधिकार
(D) अनुच्छेद 51A — राज्य के नीति-निदेशक तत्व

सही उत्तर: (D) अनुच्छेद 51A — राज्य के नीति-निदेशक तत्व।

व्याख्या: अनुच्छेद 51A मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है। राज्य के नीति-निदेशक तत्व संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक दिए गए हैं।

प्रश्न 18. भारतीय संविधान की सामाजिक न्याय संबंधी विशेषताओं के बारे में सही कथन चुनिए।

(A) संविधान केवल राजनीतिक समानता तक सीमित है।
(B) संविधान सामाजिक न्याय के लिए कोई प्रावधान नहीं करता।
(C) संविधान में अस्पृश्यता के उन्मूलन और कमजोर वर्गों के हितों को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान हैं।
(D) संविधान सभी प्रकार के सामाजिक भेदभाव को वैध बनाता है।

सही उत्तर: (C) संविधान में अस्पृश्यता के उन्मूलन और कमजोर वर्गों के हितों को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान हैं।

व्याख्या: अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है और अनुच्छेद 46 कमजोर वर्गों के शैक्षिक तथा आर्थिक हितों को बढ़ावा देने का निर्देश देता है।

प्रश्न 19. कथन और कारण पर विचार कीजिए।

कथन (A): स्वतंत्र न्यायपालिका भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषता है।

कारण (R): स्वतंत्र न्यायपालिका संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा और अधिकारों के संरक्षण में भूमिका निभाती है।

(A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(C) A सही है, R गलत है।
(D) A गलत है, R सही है।

सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

व्याख्या: न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 20. भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. भारत में लिखित संविधान है।
  2. भारत में संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है।
  3. भारत में मौलिक अधिकारों के साथ राज्य के नीति-निदेशक तत्व भी हैं।
  4. भारतीय संविधान में संशोधन की कोई व्यवस्था नहीं है।

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1, 2 और 3
(C) केवल 2, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4

सही उत्तर: (B) केवल 1, 2 और 3।

व्याख्या: पहले तीन कथन सही हैं। संविधान में अनुच्छेद 368 सहित संशोधन की व्यवस्था है, इसलिए चौथा कथन गलत है।


निष्कर्ष

भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ इसे लोकतांत्रिक, अधिकार-आधारित और कल्याणकारी शासन व्यवस्था का आधार बनाती हैं। लिखित संविधान, संविधान की सर्वोच्चता, संसदीय शासन, संघीय व्यवस्था, मौलिक अधिकार, नीति-निदेशक तत्व, मौलिक कर्तव्य और स्वतंत्र न्यायपालिका इसकी महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं।

इन विशेषताओं का संयुक्त उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत करना, नागरिकों की गरिमा की रक्षा करना, शासन को जवाबदेह बनाना और भारत की एकता तथा अखंडता को सुरक्षित रखना है।

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