Union and its Territory भारत का नक्शा कैसे बना? एक अनोखी कहानी जो हर किसी को जाननी चाहिए
नमस्ते दोस्तों! क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम स्कूल के मैप में रंग भरते हैं, तो ये राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आए कहाँ से? आज हम “संघ और इसका राज्य क्षेत्र” (Union and its Territory) को किसी भारी-भरकम किताब की तरह नहीं, बल्कि एक दिलचस्प कहानी की तरह समझेंगे।
एक छोटा सा संवाद: दादाजी की जुबानी
पोता: “दादाजी, क्या हमारा भारत हमेशा से ऐसा ही दिखता था, जैसा आज मैप में दिखता है?”
दादाजी: “नहीं बेटा! 1947 से पहले भारत एक ऐसी पहेली (Puzzle) की तरह था जिसके 500 से ज्यादा टुकड़े अलग-अलग बिखरे हुए थे। इन टुकड़ों को जोड़कर जो सुंदर तस्वीर बनी, उसे ही संविधान में ‘संघ’ (Union) कहा गया है।”
1. ‘Union’ का असली मतलब क्या है? (संविधान का अनुच्छेद 1)
संविधान की पहली लाइन कहती है— “India, that is Bharat, shall be a Union of States.” इसका मतलब बहुत गहरा है:
- भारत कोई ‘समझौता’ नहीं है कि कोई राज्य जब चाहे अलग हो जाए।
- यह एक अटूट रिश्ता है। जैसे एक बार लड्डू बन जाए, तो बूंदी वापस अलग नहीं की जा सकती, वैसे ही भारत के राज्य इससे अलग नहीं हो सकते।
2. यह बना कैसे और किसने बनाया? (The Mastermind) Union and its Territory
जब अंग्रेज भारत छोड़कर गए, तो उन्होंने एक चालाकी की। उन्होंने राजाओं से कहा, “या तो भारत में मिल जाओ, या पाकिस्तान में, या फिर अपना अलग देश बना लो।”
यहीं एंट्री हुई ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की। उन्होंने और उनके साथी वी.पी. मेनन ने हाथ में तिरंगा और दिल में जज्बा लेकर हर रियासत के राजा से बात की। उन्होंने सबको समझाया कि एकता में ही शक्ति है। इसी मेहनत का नतीजा है कि आज हम कन्याकुमारी से कश्मीर तक बिना पासपोर्ट के जा सकते हैं।
1. यह कब और कैसे आया? (तारीखों का खेल)
अनुच्छेद 1 की यात्रा 1947 से 1949 के बीच तीन चरणों में पूरी हुई:
- 29 अगस्त 1947: आजादी के चंद दिनों बाद ‘प्रारूप समिति’ (Drafting Committee) का गठन हुआ, जिसके अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर थे। उन्हें जिम्मेदारी दी गई कि वे देश का नाम और ढांचा तय करें।
- 21 फरवरी 1948: अंबेडकर ने संविधान का पहला ड्राफ्ट पेश किया। इसमें अनुच्छेद 1 में लिखा था— “India shall be a Union of States.” (भारत राज्यों का एक संघ होगा)। यहाँ ‘भारत’ शब्द गायब था।
- 18 सितंबर 1949: यह वह ऐतिहासिक दिन था जब अनुच्छेद 1 पर संविधान सभा में अंतिम बहस हुई और “India, that is Bharat” शब्दावली को स्वीकार किया गया।
प्रमुख विवाद: व्याख्या और उदाहरण
विवाद 1: “India पहले या Bharat?” (नाम का विवाद)
18 सितंबर 1949 को जब बहस शुरू हुई, तो एच.वी. कामथ ने संशोधन पेश किया कि “Bharat, or in the English language, India…” लिखा जाए।
- तर्क: कामथ ने कहा कि जब हम ‘इंडिया’ को पहले रखते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हम अपनी प्राचीन पहचान को भूलकर गुलामी के नाम को गले लगा रहे हैं।
- परिणाम: वोटिंग हुई। अंबेडकर का प्रस्ताव “India, that is Bharat” जीत गया। यह एक राजनीतिक ‘कॉम्प्रोमाइज’ था।
विवाद 2: “Union” बनाम “Federation”
- विवाद: कई सदस्यों का मानना था कि भारत को ‘Federation’ (जैसे अमेरिका) कहना चाहिए क्योंकि यहाँ अलग-अलग भाषाएं और संस्कृतियाँ हैं।
- व्याख्या: अंबेडकर ने तर्क दिया कि अमेरिका में राज्य एक समझौते के तहत आए थे, लेकिन भारत में राज्यों का कोई ‘समझौता’ नहीं है। भारत एक अखंड शरीर है जिसके हिस्से (राज्य) केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए बांटे गए हैं।
4. प्रमुख अदालती मामले (Case Laws)
अनुच्छेद 1 की शक्ति को परखने के लिए कई मामले कोर्ट पहुँचे:
1. बेरुबारी यूनियन मामला (1960)
- मामला: नेहरू सरकार ने पाकिस्तान को सीमा विवाद सुलझाने के लिए ‘बेरुबारी’ का हिस्सा देना चाहा।
- कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 1 के तहत परिभाषित भारत की जमीन सरकार ‘खैरात’ में नहीं दे सकती। अगर जमीन देनी है, तो अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना होगा। यह अनुच्छेद 1 की क्षेत्रीय अखंडता का पहला बड़ा मामला था।
2. मगनभाई ईश्वरभाई पटेल बनाम भारत संघ (1969)
- मामला: कच्छ के रन (Kutch) की सीमा को लेकर विवाद था।
- फैसला: कोर्ट ने साफ किया कि अगर केवल सीमा का निर्धारण (Adjustment) करना है तो संसद कर सकती है, लेकिन जमीन सौंपने के लिए अनुच्छेद 1 में बदलाव करना होगा।
3. ‘इंडिया’ बनाम ‘भारत’ याचिका (2016 और 2020)
- याचिकाकर्ता: संतोष मुक्ता (2016) और नमः (2020)।
- विवाद: याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ‘इंडिया’ नाम हटाकर केवल ‘भारत’ किया जाए क्योंकि ‘इंडिया’ शब्द औपनिवेशिक दासता का प्रतीक है।
- सुप्रीम कोर्ट का रुख: कोर्ट ने कहा कि संविधान में दोनों नाम हैं। नागरिकों को आजादी है कि वे जिसे चाहें इस्तेमाल करें। अनुच्छेद 1 में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है।
5. इन व्यक्तियों को क्यों चुना गया था?
- डॉ. अंबेडकर: उनकी कानूनी समझ और पश्चिम के संविधानों के ज्ञान के कारण। वे जानते थे कि ‘Union’ शब्द ही देश को बिखरने से बचा सकता है।
- के.एम. मुंशी और अल्लादि कृष्णस्वामी अय्यर: ये ड्राफ्टिंग कमेटी के स्तंभ थे जिन्होंने अंबेडकर को तकनीकी सलाह दी कि अनुच्छेद 1 को कैसे लिखा जाए ताकि यह ‘अविनाशी’ (Indestructible) रहे।
6. सारांश: यह सब क्यों हुआ?
अनुच्छेद 1 इसलिए आया ताकि:
- अस्तित्व तय हो: हम कौन हैं? (इंडिया और भारत)।
- क्षेत्र तय हो: हमारी सीमाएं कहाँ तक हैं?
- एकता बनी रहे: राज्य कभी अलग न हो सकें।
आज भी जब G20 या अन्य मंचों पर ‘भारत’ शब्द का प्रयोग होता है, तो वह इसी 18 सितंबर 1949 की बहस की याद दिलाता है। यह अनुच्छेद हमारी आधुनिकता (India) और हमारी विरासत (Bharat) का एक खूबसूरत मिलन बिंदु है।
1. नीव: 1946 से 1948 (परिकल्पना का दौर)
संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी, लेकिन अनुच्छेद 1 का असली काम अगस्त 1947 में आजादी के बाद शुरू हुआ।
- किसे और क्यों चुना गया?: डॉ. बी.आर. अंबेडकर को ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। उनके साथ अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर और के.एम. मुंशी जैसे दिग्गज थे। उन्हें इसलिए चुना गया क्योंकि अंबेडकर पश्चिमी कानून (खासकर ब्रिटिश और अमेरिकी) के विशेषज्ञ थे, जबकि मुंशी और अय्यर भारतीय रियासतों और भाषाई जटिलताओं को समझते थे।
- पहला ड्राफ्ट (21 फरवरी 1948): अंबेडकर ने जब पहला ड्राफ्ट पेश किया, तो उसमें केवल लिखा था: “India shall be a Union of States.”
- विवाद की शुरुआत: जैसे ही ‘भारत’ शब्द गायब दिखा, देश के भीतर एक बड़े वर्ग (मुख्यतः उत्तर भारत और सांस्कृतिक नेताओं) में असंतोष फैल गया। उनका तर्क था कि जिस देश ने हज़ारों साल तक अपनी पहचान ‘भारत’ के रूप में बनाए रखी, उसे एक विदेशी नाम ‘इंडिया’ के पीछे क्यों छिपाया जा रहा है?
2. वह ऐतिहासिक दिन: 18 सितंबर 1949 (महा-संग्राम)
यह वह दिन था जब संविधान सभा में अनुच्छेद 1 पर अंतिम बहस हुई। यह बहस सुबह से शुरू होकर देर शाम तक चली।
मुख्य किरदार और उनकी ‘जंग’:
- एच.वी. कामथ (H.V. Kamath): इन्होंने सबसे तीखा हमला किया। उन्होंने एक संशोधन (Amendment) पेश किया कि इसे बदलकर “Bharat, or in the English language, India” किया जाए। उन्होंने आयरलैंड का उदाहरण दिया जिसने अपना नाम ‘Eire’ रखा था।
- सेठ गोविंद दास (Seth Govind Das): इन्होंने ऐतिहासिक और धार्मिक दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि बुद्ध, वेदों और उपनिषदों के समय से यह ‘भारत’ है। उन्होंने ‘इंडिया’ को ‘ग्रीक अपभ्रंश’ बताया।
- कमलापति त्रिपाठी: इन्होंने भावुक होते हुए कहा, “किसी देश का नाम उसकी संस्कृति की अभिव्यक्ति होता है।” उन्होंने मांग की कि ‘भारत’ शब्द को प्रधानता मिलनी चाहिए।
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर का तर्क: अंबेडकर बहुत ‘प्रैक्टिकल’ (व्यावहारिक) थे। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में हम ‘India’ के नाम से जाने जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र में हमारी सदस्यता इसी नाम से है। उन्होंने इसे “India, that is Bharat” के रूप में पेश किया ताकि दोनों पक्ष शांत हो सकें। यह एक ‘संवैधानिक समझौता’ था।
3. “Union” शब्द का पेच (अखंडता की कसम)
विवाद का दूसरा हिस्सा ‘Union’ शब्द को लेकर था।
- कारण: कई लोग चाहते थे कि इसे ‘Federation’ (जैसे अमेरिका) कहा जाए।
- अंबेडकर का फैसला: उन्होंने ‘Federation’ शब्द को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत राज्यों के बीच किसी “एग्रीमेंट” (समझौते) का नतीजा नहीं है। राज्य भारत का हिस्सा हैं क्योंकि वे भारत के अंग हैं, न कि इसलिए कि वे अपनी मर्जी से साथ आए हैं।
- नतीजा: अनुच्छेद 1(1) में ‘Union’ शब्द जोड़कर यह सुनिश्चित कर दिया गया कि भारत अविनाशी (Indestructible) है। कोई भी राज्य भारत से अलग होने का अधिकार नहीं रखता।
4. कानूनी लड़ाइयाँ और कोर्ट के बड़े केस (इतिहास के पन्नों से)
अनुच्छेद 1 ने कोर्ट में कई बड़ी परीक्षाओं का सामना किया है:
क) बेरुबारी यूनियन मामला (14 मार्च 1960)
- विवाद: भारत और पाकिस्तान के बीच जमीन की अदला-बदली होनी थी। नेहरू-नून समझौता हुआ।
- सवाल: क्या अनुच्छेद 1 और 3 के तहत सरकार अपनी जमीन किसी को दे सकती है?
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 1 भारत की सीमाओं को पवित्र बनाता है। सरकार बिना ‘संविधान संशोधन’ (9वां संशोधन, 1960) के भारत का एक इंच हिस्सा भी किसी दूसरे देश को नहीं दे सकती।
ख) सिक्किम का पूर्ण विलय (1975)
- इतिहास: सिक्किम पहले भारत का हिस्सा नहीं था, वह एक ‘प्रोटेक्टोरेट’ (संरक्षित राज्य) था।
- प्रक्रिया: अनुच्छेद 1 के क्लॉज (3)(c) का इस्तेमाल हुआ, जो भारत को बाहरी क्षेत्र ‘अधिग्रहित’ (Acquire) करने की शक्ति देता है। 35वें और 36वें संशोधन के जरिए अनुच्छेद 1 की सूची में सिक्किम को 22वें राज्य के रूप में जोड़ा गया।
ग) ‘इंडिया’ बनाम ‘भारत’ याचिका (2016 और 2020)
- 2016 मामला: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “अगर आप भारत कहना चाहते हैं तो कहें, इंडिया कहना चाहते हैं तो कहें। संविधान ने दोनों अधिकार दिए हैं।”
- 3 जून 2020 मामला: एक दिल्ली निवासी ‘नमः’ ने याचिका लगाई कि ‘इंडिया’ नाम हटाकर सिर्फ ‘भारत’ किया जाए। तत्कालीन CJI एस.ए. बोबडे ने कहा— “संविधान के अनुच्छेद 1 में पहले ही लिखा है ‘India, that is Bharat’। इसमें बदलने के लिए कुछ नहीं है।”
5. तारीखें और उनका महत्व (Timeline)
| तारीख | घटना | महत्व |
| 21 फरवरी 1948 | अंबेडकर का ड्राफ्ट पेश | पहली बार लिखित रूप में अनुच्छेद 1 आया। |
| 18 सितंबर 1949 | संविधान सभा की बहस | ‘भारत’ शब्द को आधिकारिक मान्यता मिली। |
| 26 जनवरी 1950 | संविधान लागू | अनुच्छेद 1 कानूनी रूप से देश का आधार बना। |
| 1 नवंबर 1956 | राज्य पुनर्गठन अधिनियम | अनुच्छेद 1 की अनुसूची (Schedule) को पूरी तरह बदल दिया गया (भाषाई आधार पर राज्य बने)। |
| 14 मार्च 1960 | बेरुबारी फैसला | सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 1 की क्षेत्रीय अखंडता की व्याख्या की। |
6. निष्कर्ष: विवाद आज भी क्यों है?
अनुच्छेद 1 को इसलिए इस तरह लिखा गया ताकि यह ‘पुराने भारत’ (Cultural Bharat) और ‘नए भारत’ (Modern India) के बीच एक पुल का काम करे।
विवाद आज भी इसलिए उठता है क्योंकि जब भी कोई सरकार ‘भारत’ शब्द पर जोर देती है, तो उसे ‘इंडिया’ (आधुनिक/पश्चिमी पहचान) पर हमले के रूप में देखा जाता है। लेकिन संविधान के नजरिए से दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। 18 सितंबर 1949 को डॉ. अंबेडकर और अन्य महापुरुषों ने यही सोचकर यह अनुच्छेद तैयार किया था कि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी पहचान को लेकर न उलझें।
भारतीय इतिहास का वह अध्याय है जिसने अनुच्छेद 1 को उसका वास्तविक स्वरूप दिया। अगर सरदार वल्लभभाई पटेल और उनके सचिव वी.पी. मेनन ने इन 562 रियासतों को एक धागे में नहीं पिरोया होता, तो अनुच्छेद 1 का “राज्यों का संघ” (Union of States) महज एक कागजी सपना रह जाता।
आइए, इस महा-विलेय की पूरी कहानी और अनुच्छेद 1 के साथ इसके संबंध को गहराई से समझते हैं:
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1947 का वह कठिन समय)
जब 15 अगस्त 1947 को अंग्रेज भारत छोड़कर गए, तो उन्होंने ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947’ के जरिए एक बड़ी चाल चली। उन्होंने रियासतों को तीन विकल्प दिए:
- भारत में शामिल हों।
- पाकिस्तान में शामिल हों।
- या स्वतंत्र रहें (छूट)।
चुनौती: भारत के नक्शे के बीचों-बीच 562 छोटे-बड़े ‘छेद’ थे। यदि ये रियासतें स्वतंत्र रहतीं, तो दिल्ली से मुंबई जाने के लिए भी आपको पासपोर्ट और वीजा की जरूरत पड़ती।
2. सरदार पटेल और अनुच्छेद 1 का निर्माण
डॉ. अंबेडकर संविधान लिख रहे थे, लेकिन उस संविधान के लिए ‘जमीन’ सरदार पटेल तैयार कर रहे थे।
- विलय पत्र (Instrument of Accession): पटेल ने रियासतों के सामने एक ही रास्ता रखा— विलय। उन्होंने राजाओं को समझाया कि “राजशाही का युग खत्म हो चुका है, अब जनता का शासन होगा।”
- अनुच्छेद 1 का प्रभाव: अनुच्छेद 1 में जानबूझकर ‘Union’ शब्द इसलिए रखा गया क्योंकि पटेल और अंबेडकर जानते थे कि इन रियासतों को एक बार जोड़ने के बाद, उन्हें वापस जाने का कोई रास्ता (Exit Option) नहीं देना है।
3. तीन सबसे विवादित रियासतें (जिनके कारण अनुच्छेद 1 की अग्नि परीक्षा हुई)
इन तीन रियासतों के कारण भारत के संविधान और अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में भारी विवाद हुए:
क) जूनागढ़ (गुजरात) – ‘जनमत संग्रह’ का उदाहरण
- विवाद: यहाँ का नवाब मुसलमान था और जनता हिंदू। नवाब ने पाकिस्तान में मिलने का ऐलान कर दिया।
- समाधान: भारत ने हस्तक्षेप किया और नवाब भागकर पाकिस्तान चला गया।
- तारीख: 20 फरवरी 1948 को यहाँ जनमत संग्रह हुआ, जिसमें 99% जनता ने भारत (अनुच्छेद 1) का हिस्सा बनने का फैसला किया।
ख) हैदराबाद (ऑपरेशन पोलो) – ‘बल प्रयोग’ की कहानी
- विवाद: निजाम उस्मान अली खान दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति थे और अपनी स्वतंत्र सेना रखते थे। उन्होंने भारत में मिलने से मना कर दिया और ‘रजाकारों’ (निजी सेना) के जरिए जनता पर जुल्म ढाए।
- कार्रवाई: 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन पोलो’ शुरू किया।
- परिणाम: 5 दिनों में निजाम ने आत्मसमर्पण किया और हैदराबाद आधिकारिक तौर पर अनुच्छेद 1 के तहत भारत का हिस्सा बना।
ग) जम्मू-कश्मीर – ‘कानूनी विलय’ का पेच
- विवाद: राजा हरि सिंह स्वतंत्र रहना चाहते थे, लेकिन जब पाकिस्तान समर्थित कबीलाइयों ने हमला किया, तो उन्होंने मदद मांगी।
- विलय: 26 अक्टूबर 1947 को ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एसेशन’ पर हस्ताक्षर हुए।
- अदालती और संवैधानिक विवाद: कश्मीर के कारण ही अनुच्छेद 370 आया, जिसने लंबे समय तक अनुच्छेद 1 के पूर्ण क्रियान्वयन को रोके रखा। 5 अगस्त 2019 को जब 370 हटा, तब जाकर अनुच्छेद 1 सही मायनों में पूरे कश्मीर पर लागू हुआ।
4. अनुच्छेद 1 के तहत रियासतों का वर्गीकरण (1950)
जब 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ, तो इन रियासतों को सीधे राज्य नहीं बनाया गया। उन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया:
| श्रेणी (Part) | विवरण | उदाहरण |
| Part A | पूर्व ब्रिटिश प्रांत (जहाँ राज्यपाल थे) | बॉम्बे, मद्रास, बिहार |
| Part B | बड़ी रियासतें (जहाँ राजप्रमुख थे) | हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर, मैसूर |
| Part C | छोटी रियासतें (मुख्य आयुक्त के अधीन) | अजमेर, भोपाल, बिलासपुर |
| Part D | अर्जित क्षेत्र | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह |
5. विवाद और अंत: राज्य पुनर्गठन (1956)
इन रियासतों का असली विलय तब पूरा हुआ जब 1 नवंबर 1956 को ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम’ पारित हुआ।
- कारण: भाषाई आधार पर राज्यों की मांग (पोट्टी श्रीरामुलु का अनशन और मृत्यु)।
- बदलाव: संविधान के अनुच्छेद 1 की पहली अनुसूची को पूरी तरह से बदला गया। Part A, B, C, D खत्म कर दिए गए और भारत 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में बंट गया।
निष्कर्ष: पटेल का योगदान और अनुच्छेद 1 का गौरव
अगर सरदार पटेल ने उन 562 रियासतों को नहीं जोड़ा होता, तो आज अनुच्छेद 1 में “राज्यों का संघ” लिखने के लिए हमारे पास पर्याप्त राज्य ही नहीं होते। डॉ. अंबेडकर ने उसे कानूनी रूप दिया, लेकिन पटेल ने उसे भौगोलिक स्वरूप दिया।
आज का भारत, जो लद्दाख से कन्याकुमारी तक एक है, वह इसी विलय की राजनीति और अनुच्छेद 1 की कानूनी शक्ति का परिणाम है।
1. प्रिवी पर्स क्या था? (एक वादा)
जब 1947-48 में सरदार पटेल रियासतों का विलय कर रहे थे, तो राजाओं के सामने एक बड़ी चिंता थी: “अगर हमारा राज्य चला गया, तो हमारा खर्चा कैसे चलेगा?”
- समझौता: भारत सरकार ने राजाओं के साथ ‘विलय पत्र’ पर हस्ताक्षर करते समय एक वादा किया। सरकार ने कहा कि राजाओं को उनके पद और प्रतिष्ठा के अनुसार सालाना एक निश्चित राशि (पेंशन) दी जाएगी। इसे ही ‘प्रिवी पर्स’ कहा गया।
- संवैधानिक दर्जा: इस वादे को पक्का करने के लिए संविधान में अनुच्छेद 291 और अनुच्छेद 362 जोड़े गए। यानी, यह सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं था, बल्कि एक संवैधानिक गारंटी थी।
2. विवाद की शुरुआत: क्यों और किसके कारण?
वक्त बदला और 1960 के दशक के अंत तक भारतीय राजनीति की दिशा बदल गई।
- इन्दिरा गांधी का उदय: 1967 के बाद इन्दिरा गांधी ने ‘समाजवाद’ का नारा दिया। उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ हम गरीबी हटाना चाहते हैं और दूसरी तरफ मुट्ठी भर राजाओं को बिना कुछ किए जनता के टैक्स का करोड़ों रुपया दे रहे हैं। यह ‘समानता के अधिकार’ (Article 14) के खिलाफ है।
- आर्थिक कारण: उस समय भारत की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और राजाओं को दिया जाने वाला पैसा (करीब 5 करोड़ रुपये सालाना) एक बड़ा बोझ माना जाने लगा।
3. संसद बनाम कोर्ट: सबसे बड़ा कानूनी युद्ध
इन्दिरा गांधी ने प्रिवी पर्स खत्म करने का फैसला किया, लेकिन यह इतना आसान नहीं था।
क) राज्यसभा में हार (1970)
सरकार ने संविधान संशोधन बिल पेश किया। लोकसभा में तो यह पास हो गया, लेकिन राज्यसभा में यह महज 1 वोट से गिर गया।
ख) राष्ट्रपति का आदेश
बिल गिरने के बाद इन्दिरा गांधी ने हार नहीं मानी। उन्होंने उसी रात राष्ट्रपति वी.वी. गिरि से एक ‘कार्यकारी आदेश’ (Executive Order) पर दस्तखत करवाए, जिसके तहत राजाओं की मान्यता छीन ली गई और प्रिवी पर्स बंद कर दिया गया।
ग) माधवराव सिंधिया बनाम भारत संघ (1970) – ऐतिहासिक केस
ग्वालियर के महाराजा माधवराव सिंधिया और अन्य राजा इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए।
- राजाओं का तर्क: “सरकार ने हमसे वादा किया था। यह हमारी संपत्ति का अधिकार है।”
- कोर्ट का फैसला (15 दिसंबर 1970): सुप्रीम कोर्ट की 11 जजों की बेंच ने सरकार के आदेश को असंवैधानिक घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार एक झटके में राजाओं के संवैधानिक अधिकार नहीं छीन सकती।
4. संविधान का 26वां संशोधन (1971)
सुप्रीम कोर्ट से हारने के बाद इन्दिरा गांधी ‘गरीबी हटाओ’ के नारे के साथ भारी बहुमत से चुनाव जीतकर आईं। उन्होंने आते ही संविधान में 26वां संशोधन किया।
- क्या बदला गया?: इस संशोधन के जरिए संविधान से अनुच्छेद 291 और 362 को पूरी तरह मिटा दिया गया। * नतीजा: राजाओं के सभी विशेषाधिकार, उपाधियाँ (जैसे ‘महाराजा’, ‘हिज हाइनेस’) और प्रिवी पर्स कानूनी रूप से हमेशा के लिए खत्म हो गए।
5. अनुच्छेद 1 पर इसका प्रभाव
इस पूरे विवाद ने अनुच्छेद 1 की इस परिभाषा को और मजबूत किया कि “भारत राज्यों का एक संघ है”, न कि “राजाओं का एक संघ”।
- एक राष्ट्र, एक नागरिक: प्रिवी पर्स के खात्मे ने यह सुनिश्चित कर दिया कि भारत के भीतर कोई ‘विशेष वर्ग’ नहीं होगा। जो राजा कल तक अनुच्छेद 1 के तहत अपनी रियासतों के मालिक थे, अब वे सामान्य नागरिक बन गए।
- अखंडता: इसने साबित किया कि भारत का संघ (Union) सर्वोच्च है और किसी भी पुराने समझौते (Treaty) को जनहित में बदला जा सकता है।
सारांश: मुख्य व्यक्ति और तारीखें
| तिथि | घटना | परिणाम |
| 1947-49 | विलय पत्र पर हस्ताक्षर | प्रिवी पर्स की शुरुआत हुई। |
| 5 सितंबर 1970 | राज्यसभा में बिल पेश | बिल 1 वोट से फेल हो गया। |
| 15 दिसंबर 1970 | SC का फैसला | राजाओं की जीत हुई, सरकारी आदेश रद्द। |
| 28 दिसंबर 1971 | 26वां संशोधन | प्रिवी पर्स हमेशा के लिए खत्म। |
मुख्य व्यक्ति:
- इन्दिरा गांधी: प्रिवी पर्स खत्म करने वाली मुख्य सूत्रधार।
- माधवराव सिंधिया: सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई का नेतृत्व करने वाले प्रमुख राजा।
- एच.एम. सीरवाई: प्रसिद्ध वकील जिन्होंने सरकार का पक्ष रखा।
प्रिवी पर्स का खत्म होना भारतीय लोकतंत्र की एक बड़ी जीत मानी जाती है, क्योंकि इसने सदियों पुरानी सामंतशाही (Feudalism) को कानूनी रूप से दफन कर दिया।
अनुच्छेद 1 की कहानी तब तक अधूरी है जब तक हम केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) के जन्म और उनके पीछे की सियासत को न समझ लें। यह हिस्सा अनुच्छेद 1 के उस क्लॉज (Clause 3b) से जुड़ा है, जो कहता है कि भारत के क्षेत्र में केवल ‘राज्य’ नहीं, बल्कि ‘केंद्र शासित प्रदेश’ भी शामिल होंगे।
लेकिन सवाल यह है कि इन्हें बनाया क्यों गया? इन्हें राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिया गया? और इनके कारण दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक क्या-क्या महाभारत हुई? आइए, इसे शुरू से देखते हैं।
1. केंद्र शासित प्रदेशों का जन्म: 1956 की वह तारीख
जब 1950 में संविधान बना, तब ‘केंद्र शासित प्रदेश’ जैसा कोई शब्द नहीं था। तब राज्यों को Part A, B, C और D में बांटा गया था।
- बदलाव की वजह: राज्यों के बीच बहुत ज्यादा असमानता थी। कुछ बहुत बड़े थे, कुछ बहुत छोटे।
- 7वां संविधान संशोधन (1 नवंबर 1956): इस तारीख को राज्य पुनर्गठन आयोग (Fayzal Ali Commission) की सिफारिश पर पुरानी श्रेणियों को खत्म कर दिया गया। यहाँ जन्म हुआ दो श्रेणियों का:
- राज्य (States)
- केंद्र शासित प्रदेश (Union Territories)
इन्हें क्यों बनाया गया? इसके पीछे तीन मुख्य कारण थे:
- सुरक्षा (Strategic Importance): जैसे अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप, जो मुख्य भूमि से दूर थे।
- सांस्कृतिक पहचान: जैसे दादरा-नगर हवेली, गोवा और पुडुचेरी (यहाँ पुर्तगाली और फ्रांसीसी प्रभाव था, जिसे बचाना था)।
- प्रशासनिक विवाद: जैसे दिल्ली और चंडीगढ़।
2. दिल्ली का विवाद: “आधा राज्य या पूरा शहर?”
अनुच्छेद 1 के तहत दिल्ली सबसे बड़ा सिरदर्द रही है।
- विवाद: दिल्ली देश की राजधानी है। यहाँ केंद्र सरकार बैठती है, विदेशी दूतावास हैं। अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य बना दिया जाए, तो कानून-व्यवस्था (Police) राज्य के हाथ में चली जाएगी, जिससे केंद्र की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
- 69वां संशोधन (1991): इसके जरिए दिल्ली को ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र’ (NCT) बनाया गया और अनुच्छेद 239AA जोड़ा गया।
- कोर्ट केस (2018 और 2023): सुप्रीम कोर्ट में ‘दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल (LG)’ का लंबा युद्ध चला।
- विवाद का केंद्र: मुख्यमंत्री बड़ा या केंद्र द्वारा नियुक्त LG?
- फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा कि दिल्ली “पूर्ण राज्य” नहीं है, लेकिन चुनी हुई सरकार के पास शक्तियाँ होनी चाहिए। हालांकि, केंद्र ने अध्यादेश लाकर फिर से सेवाओं (Services) पर नियंत्रण कर लिया।
3. चंडीगढ़: दो राज्यों की एक ही ‘चाबी’
चंडीगढ़ का विवाद अनुच्छेद 1 के इतिहास का सबसे अनोखा हिस्सा है।
- तारीख: 1 नवंबर 1966। पंजाब से अलग होकर हरियाणा बना।
- विवाद: दोनों राज्यों को अपनी राजधानी के लिए चंडीगढ़ चाहिए था।
- समाधान: केंद्र ने इसे ‘केंद्र शासित प्रदेश’ बना दिया ताकि यह दोनों की संयुक्त राजधानी रहे। यह भारत का एकमात्र ऐसा शहर है जो दो राज्यों की राजधानी भी है और खुद एक केंद्र शासित प्रदेश भी। आज भी पंजाब और हरियाणा की विधानसभाओं में इसे अपना बताने की जंग जारी है।
4. गोवा और पुडुचेरी: विदेशी चंगुल से आजादी
अनुच्छेद 1 के क्लॉज (3c) में ‘अर्जित क्षेत्र’ (Acquired Territories) की बात है।
- गोवा (1961): ऑपरेशन विजय के जरिए पुर्तगालियों को भगाया गया। पहले गोवा एक UT था, लेकिन 30 मई 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
- पुडुचेरी: यहाँ फ्रांसीसियों का शासन था। 1954 में उन्होंने इसे भारत को सौंपा, लेकिन कानूनी रूप से यह 1962 में भारत का हिस्सा बना।
5. जम्मू-कश्मीर: सबसे बड़ा और हालिया बदलाव
अनुच्छेद 1 के इतिहास की सबसे बड़ी घटना 31 अक्टूबर 2019 को हुई।
- क्या हुआ?: एक पूर्ण राज्य (जम्मू-कश्मीर) को तोड़कर दो केंद्र शासित प्रदेशों (J&K और लद्दाख) में बदल दिया गया।
- इतिहास में पहली बार: भारत के इतिहास में हमेशा केंद्र शासित प्रदेश से ‘राज्य’ बनाया गया था (जैसे हिमाचल, गोवा, मणिपुर), लेकिन यह पहली बार था जब किसी ‘राज्य’ को ‘केंद्र शासित प्रदेश’ बनाया गया।
- विवाद: यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर मुहर लगाई लेकिन सरकार को आदेश दिया कि जल्द से जल्द जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिया जाए।
6. सारांश: अनुच्छेद 1 के किरदारों की भूमिका
- जवाहरलाल नेहरू: उन्होंने विदेशी क्षेत्रों (गोवा, पुडुचेरी) के शांतिपूर्ण विलय पर जोर दिया।
- एस. फाज़ल अली: जिनके आयोग ने 1956 में केंद्र शासित प्रदेशों का खाका खींचा।
- अमित शाह (2019): जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के जरिए अनुच्छेद 1 की सीमाओं को फिर से परिभाषित किया।
निष्कर्ष: अनुच्छेद 1 के तहत केंद्र शासित प्रदेश इसलिए रखे गए हैं ताकि केंद्र सरकार देश के रणनीतिक और महत्वपूर्ण हिस्सों पर सीधा नियंत्रण रख सके। यह “राज्यों के संघ” को एक मजबूती प्रदान करता है, जहाँ केंद्र एक ‘अभिभावक’ की भूमिका में होता है।
अनुच्छेद 1 की यह गाथा तब तक अधूरी है जब तक हम आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के संघर्ष को न समझ लें। यह भारत के नक्शे को बदलने वाली वह घटनाएँ हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि अनुच्छेद 1 में लिखा ‘राज्यों का संघ’ (Union of States) कोई पत्थर की लकीर नहीं है, बल्कि इसे जन-आकांक्षाओं के आधार पर बदला जा सकता है।
यहाँ इन दो राज्यों के जन्म और उनके पीछे के भीषण विवादों का पूरा इतिहास है:
1. आंध्र प्रदेश: भाषाई क्रांति का जन्म (1953)
भारत की आजादी के समय मद्रास प्रेसीडेंसी बहुत बड़ी थी, जिसमें तमिल और तेलुगु बोलने वाले लोग एक साथ रहते थे।
- विवाद की वजह: तेलुगु भाषी लोग महसूस करते थे कि मद्रास की सरकार में तमिलों का बोलबाला है। वे अपने लिए एक अलग राज्य ‘आंध्र’ चाहते थे।
- मुख्य व्यक्ति – पोट्टी श्रीरामुलु: 19 अक्टूबर 1952 को एक गांधीवादी नेता पोट्टी श्रीरामुलु ने आमरण अनशन शुरू किया। 56 दिनों तक बिना कुछ खाए उनकी मृत्यु हो गई।
- परिणाम: उनकी मौत के बाद पूरे दक्षिण भारत में हिंसक दंगे भड़क उठे। प्रधानमंत्री नेहरू को झुकना पड़ा।
- तारीख: 1 अक्टूबर 1953 को भाषाई आधार पर बनने वाला भारत का पहला राज्य ‘आंध्र’ बना। इसने अनुच्छेद 1 के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया क्योंकि इसके बाद ही पूरे देश में भाषाई आधार पर राज्य बनाने की मांग उठी।
2. ‘आंध्र’ से ‘आंध्र प्रदेश’ (1956)
जब 1956 में राज्य पुनर्गठन हुआ, तो हैदराबाद रियासत के तेलुगु भाषी इलाकों (तेलंगाना) को आंध्र में मिला दिया गया और नाम पड़ा— आंध्र प्रदेश।
- समझौता: उस समय ‘जेंटलमैन एग्रीमेंट’ (Gentlemen’s Agreement) हुआ था ताकि तेलंगाना के लोगों के हितों की रक्षा हो सके, लेकिन यही समझौता आगे चलकर विवाद की सबसे बड़ी जड़ बना।
3. तेलंगाना: 60 साल का लंबा संघर्ष (2014)
तेलंगाना के लोगों का मानना था कि तटीय आंध्र के लोग उनकी नौकरियां और संसाधन (खासकर पानी) छीन रहे हैं।
- विवाद का केंद्र: 1969 में ‘जय तेलंगाना’ आंदोलन शुरू हुआ जिसमें सैकड़ों छात्र मारे गए।
- के. चंद्रशेखर राव (KCR) का उदय: 2001 में उन्होंने TRS पार्टी बनाई और आंदोलन को घर-घर पहुँचा दिया। 2009 में उनके आमरण अनशन ने केंद्र सरकार को हिला दिया।
- तारीख: 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश का विभाजन हुआ और तेलंगाना भारत का 29वां राज्य (उस समय के अनुसार) बना।
4. कानूनी और संवैधानिक विवाद: अनुच्छेद 1, 2 और 3 का मेल
तेलंगाना का बनना संवैधानिक रूप से बहुत विवादित रहा।
- विवाद का कारण: आंध्र प्रदेश की विधानसभा ने राज्य के बंटवारे के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। फिर भी केंद्र सरकार ने इसे संसद में पास करा दिया।
- कोर्ट में चुनौती: इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई कि “क्या विधानसभा की मर्जी के बिना राज्य को बांटा जा सकता है?”
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कोर्ट ने अनुच्छेद 3 की व्याख्या करते हुए कहा कि संसद के पास किसी भी राज्य की सीमा बदलने या उसे खत्म करने की असीमित शक्ति है। विधानसभा की राय लेना जरूरी है, लेकिन उसे मानना जरूरी नहीं। इसने अनुच्छेद 1 के ‘Union’ (संघ) शब्द को फिर से परिभाषित किया कि केंद्र सबसे शक्तिशाली है।
5. आज का परिदृश्य: अनुच्छेद 1 की स्थिति
इन बदलावों के बाद अनुच्छेद 1 के साथ जुड़ी ‘पहली अनुसूची’ (First Schedule) में बार-बार संशोधन हुए।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014: इसके तहत हैदराबाद को 10 साल के लिए संयुक्त राजधानी बनाया गया (जो अब केवल तेलंगाना की राजधानी है)।
- अमरावती का मुद्दा: आंध्र प्रदेश अपनी नई राजधानी को लेकर अब भी अदालती लड़ाइयों में उलझा हुआ है।
निष्कर्ष: अनुच्छेद 1 का संदेश
आंध्र और तेलंगाना का इतिहास यह सिखाता है कि भारत का अनुच्छेद 1 केवल सीमाओं का नक्शा नहीं है, बल्कि यह जीवित लोकतंत्र का हिस्सा है।
- नेहरू ने भाषाई आधार पर राज्य बनाने का विरोध किया था, लेकिन जनभावना के आगे उन्हें झुकना पड़ा।
- अंबेडकर ने अनुच्छेद 3 को इसलिए इतना लचीला रखा था ताकि भविष्य में जब जनता चाहे, तो नए राज्य शांतिपूर्ण तरीके से बनाए जा सकें।
आज अनुच्छेद 1 के तहत भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। हर एक राज्य के जुड़ने या बदलने के पीछे एक लंबी कहानी और कई लोगों का बलिदान है।
2. किस वजह से और किसके कारण जोड़ा गया?
इसे जोड़ने के पीछे दो मुख्य व्यक्ति और दो मुख्य विचारधाराएं थीं:
क) डॉ. बी.आर. अंबेडकर (प्रशासनिक और कानूनी कारण)
अंबेडकर चाहते थे कि भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाए। चूंकि संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य वैश्विक मंचों पर हम ‘India’ के नाम से दर्ज थे, इसलिए उन्होंने ‘India’ को प्राथमिकता दी।
- Union क्यों जोड़ा?: उन्होंने ‘Federation’ शब्द को हटाकर ‘Union’ जोड़ा ताकि भविष्य में कोई राज्य (जैसे हैदराबाद या जूनागढ़) भारत से अलग होने की मांग न कर सके।
ख) राष्ट्रवादी गुट (सांस्कृतिक कारण)
सेठ गोविंद दास, एच.वी. कामथ और कमलापति त्रिपाठी जैसे नेताओं का दबाव था कि देश का नाम उसकी मिट्टी से जुड़ा होना चाहिए। उनके दबाव के कारण ही अंबेडकर को झुकना पड़ा और ‘भारत’ शब्द जोड़ना पड़ा।
3. क्या भारत का नक्शा बदल सकता है? (संसद की जादुई शक्ति)
संविधान का अनुच्छेद 2 और 3 संसद को एक जादुई पेंसिल देता है।
- अनुच्छेद 2: अगर कोई बाहर का इलाका भारत का हिस्सा बनना चाहे (जैसे 1975 में सिक्किम आया), तो उसे घर में जगह देना।
- अनुच्छेद 3: भारत के अंदर ही किसी राज्य का नाम बदलना, दो राज्यों को जोड़ना या एक बड़े राज्य को दो हिस्सों में बाँटना (जैसे तेलंगाना बना)।
4. क्यों बना? (जरूरत क्या थी?)
सोचिए, अगर हर शहर का अपना अलग कानून और बॉर्डर होता, तो हमें एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए वीज़ा लेना पड़ता! देश को प्रशासनिक रूप से आसान बनाने और सभी धर्मों-भाषाओं के लोगों को एक सूत्र में पिरोने के लिए ‘राज्यों के संघ’ की व्यवस्था की गई।
5. यह चर्चा में क्यों रहता है? (करेंट अपडेट)
आजकल हम अक्सर सुनते हैं कि किसी नए राज्य की मांग हो रही है या किसी केंद्र शासित प्रदेश (UT) को राज्य बनाया जा रहा है (जैसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का मामला)। यह सब इसी “संघ और राज्य क्षेत्र” के नियमों के तहत होता है।
निष्कर्ष: हमारा प्यारा भारत
तो दोस्तों, “संघ और इसका राज्य क्षेत्र” का मतलब सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों का घर है जो अलग-अलग भाषाएं बोलते हुए भी एक ही पहचान रखते हैं— भारतीय।
संघ और इसका राज्य क्षेत्र (Union and its Territory) 100 PYQ
प्रश्न: 1 – भारतीय संविधान के अनुच्छेद-1 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसमें ‘भारत’ और ‘इंडिया’ दोनों नामों का उल्लेख है।
- भारत को ‘राज्यों का संघ’ (Union of States) कहा गया है।
UPSC 2020, SSC CGL 2022
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (C)
हल/व्याख्या: अनुच्छेद 1(1) के अनुसार, “इंडिया, जो कि भारत है, राज्यों का संघ होगा।” इसमें देश का नाम और शासन प्रणाली दोनों स्पष्ट हैं।
प्रश्न: 2 – भारतीय संघ में किसी नए राज्य को सम्मिलित करने का अधिकार किसे प्राप्त है?
UPPSC 2021, MPPSC 2023
(A) राष्ट्रपति को
(B) संसद को
(C) प्रधानमंत्री को
(D) उच्चतम न्यायालय को
उत्तर: (B)
हल/व्याख्या: अनुच्छेद 2 के तहत संसद को विधि द्वारा नए राज्यों को संघ में प्रवेश देने या उनकी स्थापना करने की शक्ति दी गई है।
प्रश्न: 3 – भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन हेतु ‘धर आयोग’ (Dhar Commission) की नियुक्ति कब की गई थी?
BPSC 2022, UP RO/ARO 2023
(A) जनवरी 1948
(B) जून 1948
(C) दिसंबर 1948
(D) जून 1949
उत्तर: (B)
हल/व्याख्या: एस.के. धर की अध्यक्षता में जून 1948 में आयोग बना था, जिसने भाषाई आधार के बजाय प्रशासनिक सुविधा के आधार पर पुनर्गठन की सिफारिश की थी।
प्रश्न: 4 – निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन द्वारा ‘सिक्किम’ को भारतीय संघ का पूर्ण राज्य बनाया गया?
SSC CHSL 2021, Teaching Exam 2023
(A) 34वाँ संशोधन
(B) 35वाँ संशोधन
(C) 36वाँ संशोधन
(D) 42वाँ संशोधन
उत्तर: (C)
हल/व्याख्या: 35वें संशोधन (1974) से सिक्किम ‘सह-राज्य’ बना, जबकि 36वें संशोधन (1975) से इसे 22वें पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
प्रश्न: 5 – नए राज्यों के निर्माण हेतु संवैधानिक संशोधन के लिए किस प्रकार के बहुमत की आवश्यकता होती है?
UPSC 2021, CDS 2022
(A) साधारण बहुमत
(B) दो-तिहाई बहुमत
(C) दो-तिहाई बहुमत और आधे राज्यों का अनुसमर्थन
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (A)
हल/व्याख्या: अनुच्छेद 4 स्पष्ट करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाई गई विधियाँ साधारण बहुमत से पारित होंगी और इन्हें अनुच्छेद 368 के तहत ‘संशोधन’ नहीं माना जाएगा।
प्रश्न: 6 – आंध्र प्रदेश एक भाषाई राज्य के रूप में कब गठित किया गया?
Railway RRB NTPC 2021, SSC MTS 2023
(A) 1950
(B) 1953
(C) 1956
(D) 1961
उत्तर: (B)
हल/व्याख्या: पोट्टी श्रीरामुलु के 56 दिन के आमरण अनशन के बाद, 1 अक्टूबर 1953 को मद्रास से अलग कर भाषाई आधार पर पहला राज्य आंध्र प्रदेश बना।
प्रश्न: 7 – राज्य पुनर्गठन आयोग (1953) के अध्यक्ष कौन थे?
UPSSSC PET 2021, BPSC 2023
(A) एच.एन. कुंजरू
(B) फजल अली
(C) के.एम. पणिक्कर
(D) वल्लभभाई पटेल
उत्तर: (B)
हल/व्याख्या: 1953 में गठित तीन सदस्यीय आयोग के अध्यक्ष फजल अली थे, अन्य सदस्य के.एम. पणिक्कर और हृदयनाथ कुंजरू थे।
प्रश्न: 8 – ‘दादरा और नगर हवेली’ तथा ‘दमन और दीव’ के विलय के बाद अब भारत में कितने केंद्र शासित प्रदेश हैं?
SSC CGL 2020, Bank PO 2021
(A) 7
(B) 8
(C) 9
(D) 28
उत्तर: (B)
हल/व्याख्या: 26 जनवरी 2020 से इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों को मिला दिया गया, जिससे संख्या 9 से घटकर 8 रह गई है।
प्रश्न: 9 – अनुच्छेद-3 के तहत किसी राज्य की सीमा में परिवर्तन या नाम बदलने हेतु विधेयक संसद में पेश करने से पूर्व किसकी सहमति अनिवार्य है?
UPSC 2022, CAPF 2023
(A) संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री की
(B) संबंधित राज्य के विधानमंडल की
(C) भारत के राष्ट्रपति की
(D) राज्यपाल की
उत्तर: (C)
हल/व्याख्या: अनुच्छेद 3 के तहत विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश (Prior recommendation) के बिना संसद में पेश नहीं किया जा सकता।
प्रश्न: 10 – हरियाणा राज्य का गठन किस वर्ष किया गया था?
HSSC 2021, Railway 2022
(A) 1960
(B) 1966
(C) 1970
(D) 1975
उत्तर: (B)
हल/व्याख्या: पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के द्वारा पंजाब से अलग कर हरियाणा को 17वें राज्य के रूप में स्थापित किया