Preamble Of Constitution: 1. उद्देशिका क्या है? (परिभाषा)
सरल शब्दों में, उद्देशिका संविधान का ‘परिचय’ या ‘भूमिका’ है। जैसे किसी पुस्तक को पढ़ने से पहले उसकी ‘प्रस्तावना’ पढ़कर हम समझ जाते हैं कि पुस्तक किस बारे में है, वैसे ही उद्देशिका हमें बताती है कि संविधान का स्रोत क्या है, भारतीय राज्य की प्रकृति कैसी है और इसके नागरिकों के लक्ष्य क्या हैं।
एन.ए. पालकीवाला ने इसे “संविधान का परिचय पत्र” (Identity Card of the Constitution) कहा है।
2. यह कहाँ से लिया गया? (स्रोत)
उद्देशिका के संदर्भ में दो महत्वपूर्ण बातें हैं:
- विचार: उद्देशिका का विचार अमेरिका (USA) के संविधान से लिया गया है। अमेरिका विश्व का पहला देश था जिसने अपने संविधान में प्रस्तावना को शामिल किया।
- भाषा: उद्देशिका की विशिष्ट भाषा और ढांचा ऑस्ट्रेलिया के संविधान से प्रभावित है।
3. यह कब और किसके कारण आया? (ऐतिहासिक पृष्ठभूमि)
उद्देशिका का आधार पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा पेश किया गया ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ (Objectives Resolution) है।
- 13 दिसंबर, 1946: नेहरू जी ने संविधान सभा के सामने यह प्रस्ताव रखा। इसमें बताया गया था कि हम कैसा भारत बनाना चाहते हैं।
- 22 जनवरी, 1947: संविधान सभा ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
- 26 नवंबर, 1949: संविधान के साथ ही इसे अंगीकृत किया गया।
4. यह क्यों आया? (महत्व और उद्देश्य)
उद्देशिका लाने के मुख्य चार कारण थे:
- सत्ता का स्रोत: यह स्पष्ट करता है कि शक्ति का असली स्रोत “भारत के लोग” हैं।
- राज्य की प्रकृति: यह बताता है कि भारत एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य है।
- न्याय और अधिकार: यह नागरिकों के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने का संकल्प है।
- संविधान की तिथि: यह संविधान को लागू करने (अंगीकृत करने) की तारीख (26 नवंबर 1949) को प्रमाणित करता है।
5. प्रमुख शब्दावली का अर्थ (UPSC के लिए महत्वपूर्ण)
- संप्रभु (Sovereign): भारत न किसी बाहरी शक्ति के अधीन है और न ही किसी का डोमिनियन है। वह अपने आंतरिक और बाहरी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
- समाजवादी (Socialist): भारत में ‘लोकतांत्रिक समाजवाद’ है, जिसका अर्थ है गरीबी, बीमारी और अवसर की असमानता को समाप्त करना।
- पंथनिरपेक्ष (Secular): राज्य का अपना कोई धर्म नहीं है। सभी धर्मों को समान संरक्षण और सम्मान प्राप्त है।
- गणराज्य (Republic): भारत का राष्ट्रप्रमुख (राष्ट्रपति) वंशानुगत नहीं होता, बल्कि एक निश्चित समय के लिए चुना जाता है।
6. ऐतिहासिक विवाद और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय
उद्देशिका को लेकर सबसे बड़ा विवाद यह था कि “क्या यह संविधान का हिस्सा है?”
| वर्ष | मामला (Case) | निर्णय (Verdict) |
| 1960 | बेरुबारी संघ मामला | सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उद्देशिका संविधान का हिस्सा नहीं है। इसे केवल संविधान की भाषा समझने के लिए ‘मार्गदर्शक’ माना जा सकता है। |
| 1973 | केशवानंद भारती मामला | ऐतिहासिक निर्णय में कोर्ट ने पुरानी गलती सुधारी और कहा कि उद्देशिका संविधान का अभिन्न अंग है। |
| 1995 | LIC of India मामला | कोर्ट ने पुन: दोहराया कि उद्देशिका संविधान का आंतरिक हिस्सा है। |
7. क्या उद्देशिका में संशोधन किया जा सकता है?
केशवानंद भारती मामले (1973) के बाद यह स्पष्ट हो गया कि अनुच्छेद 368 के तहत उद्देशिका में संशोधन किया जा सकता है, लेकिन इसके “मूल ढांचे” (Basic Structure) को बदला नहीं जा सकता।
- 42वां संविधान संशोधन (1976): अब तक उद्देशिका में केवल एक बार संशोधन हुआ है। इसके द्वारा तीन नए शब्द जोड़े गए:
- समाजवादी (Socialist)
- पंथनिरपेक्ष (Secular)
- अखंडता (Integrity)
8. निष्कर्ष
उद्देशिका भारतीय संविधान की आत्मा है। यह न केवल प्रशासन के लिए एक दिशा-निर्देश है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों का कवच भी है। UPSC की दृष्टि से, यह समझना जरूरी है कि उद्देशिका ‘न्यायसंगत’ (Justiciable) नहीं है, यानी इसके उल्लंघन पर आप सीधे कोर्ट नहीं जा सकते, लेकिन कानून की व्याख्या करने में यह सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है।
भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ एवं नागरिकता: एक संपूर्ण विश्लेषण (UPSC/PCS Level)
भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की आशाओं और आकांक्षाओं का जीवंत प्रतीक है। यह विश्व का सबसे अनूठा और विस्तृत संविधान है। आइए, इसकी प्रमुख विशेषताओं और नागरिकता संबंधी प्रावधानों को गहराई से समझते हैं।
भाग 1: भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ (Salient Features)
भारतीय संविधान की प्रकृति ‘उधार का थैला’ (Bag of Borrowings) कही जाती है, लेकिन असल में यह दुनिया भर के श्रेष्ठ प्रावधानों का भारतीय परिस्थितियों के अनुसार एक उत्कृष्ट मिश्रण है।
1. विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान
भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। मूल रूप से इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं। वर्तमान में संशोधनों के बाद इसमें लगभग 470 अनुच्छेद, 25 भाग और 12 अनुसूचियाँ हैं। इसके इतना विस्तृत होने का मुख्य कारण भारत की भौगोलिक विविधता और केंद्र-राज्यों के लिए एकल संविधान होना है।
2. कठोरता और लचीलेपन का मिश्रण (Rigidity vs Flexibility)
अनुच्छेद 368 के तहत भारतीय संविधान न तो अमेरिका की तरह बहुत कठोर है और न ही ब्रिटेन की तरह बहुत लचीला।
- लचीलापन: कुछ प्रावधानों को संसद के साधारण बहुमत से बदला जा सकता है।
- कठोरता: कुछ महत्वपूर्ण संशोधनों के लिए विशेष बहुमत (2/3) और कम से कम आधे राज्यों की सहमति अनिवार्य है।
3. एकात्मक झुकाव के साथ संघीय व्यवस्था (Federal System with Unitary Bias)
संविधान भारत को “राज्यों का संघ” (Union of States) कहता है। इसमें संघीय लक्षण (दो सरकारें, शक्तियों का विभाजन) तो हैं, लेकिन आपातकाल के दौरान यह पूर्णतः एकात्मक (Unitary) हो जाता है, जहाँ केंद्र सर्वशक्तिमान हो जाता है। इसी कारण के.सी. ह्वियर ने इसे ‘अर्ध-संघीय’ (Quasi-federal) कहा है।
4. संसदीय शासन प्रणाली
भारत ने ब्रिटिश मॉडल पर आधारित संसदीय प्रणाली को अपनाया है। इसमें राष्ट्रपति ‘नाममात्र’ का प्रमुख होता है, जबकि वास्तविक कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में निहित होती है। यह प्रणाली विधायिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय पर टिकी है।
5. स्वतंत्र एवं एकीकृत न्यायपालिका
भारत में न्यायपालिका की एक पिरामिड संरचना है, जिसके शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) है। यह न केवल मौलिक अधिकारों का रक्षक है, बल्कि संविधान का अंतिम व्याख्याकार भी है। न्यायपालिका को कार्यपालिका से पूरी तरह स्वतंत्र रखा गया है।
6. मौलिक अधिकार, नीति निर्देशक तत्व और मौलिक कर्तव्य
- मौलिक अधिकार (भाग III): यह नागरिकों को राज्य की निरंकुशता से बचाते हैं।
- नीति निर्देशक तत्व (भाग IV): यह राज्य को एक ‘कल्याणकारी राज्य’ (Welfare State) बनाने का निर्देश देते हैं।
- मौलिक कर्तव्य (भाग IV-A): 42वें संशोधन (1976) द्वारा जोड़े गए, जो नागरिकों को उनके उत्तरदायित्वों का बोध कराते हैं।
भाग 2: भारतीय नागरिकता (Citizenship) – अनुच्छेद 5 से 11
नागरिकता किसी व्यक्ति और राज्य के बीच के कानूनी संबंध को दर्शाती है। भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5 से 11) में नागरिकता का विवरण दिया गया है।
1. एकल नागरिकता (Single Citizenship)
अमेरिका जैसे देशों में दोहरी नागरिकता है (देश की और राज्य की), लेकिन भारत में केवल एकल नागरिकता का प्रावधान है। चाहे कोई व्यक्ति उत्तर प्रदेश का हो या केरल का, वह केवल ‘भारत का नागरिक’ कहलाता है। यह प्रावधान राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए ब्रिटेन से लिया गया है।
2. संवैधानिक प्रावधान (प्रारंभिक नागरिकता)
संविधान लागू होने के समय (26 जनवरी 1950) नागरिकता के चार आधार थे:
- अनुच्छेद 5: भारत के अधिवास (Domicile) द्वारा नागरिकता।
- अनुच्छेद 6: पाकिस्तान से भारत आए व्यक्तियों के अधिकार।
- अनुच्छेद 7: पाकिस्तान जाकर पुनः भारत लौटने वालों के अधिकार।
- अनुच्छेद 8: विदेश में रह रहे भारतीय मूल के व्यक्तियों के अधिकार।
3. संसद की शक्ति (अनुच्छेद 11)
संविधान ने नागरिकता पर कोई स्थायी कानून नहीं बनाया। अनुच्छेद 11 संसद को यह अधिकार देता है कि वह नागरिकता के अर्जन (Acquisition) और समाप्ति (Termination) पर कानून बनाए। इसी शक्ति का प्रयोग कर संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 पारित किया।
4. नागरिकता प्राप्त करने के 5 तरीके (अधिनियम 1955)
- जन्म से (By Birth): भारत में पैदा हुए व्यक्ति (नियमों के अधीन)।
- वंश द्वारा (By Descent): यदि माता-पिता में से कोई भारतीय हो।
- पंजीकरण द्वारा (By Registration): आवेदन के माध्यम से (निश्चित निवास अवधि के बाद)।
- प्राकृतिकरण द्वारा (By Naturalization): विदेशी नागरिकों के लिए (कला, विज्ञान या सेवा के आधार पर)।
- क्षेत्र विस्तार द्वारा (By Incorporation of Territory): यदि भारत किसी नए क्षेत्र को अपने में मिला ले (जैसे सिक्किम या पुडुचेरी)।
5. नागरिकता की समाप्ति
नागरिकता तीन तरह से खत्म हो सकती है:
- स्वैच्छिक त्याग (Renunciation): स्वयं छोड़ देना।
- बर्खास्तगी (Termination): स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता लेने पर।
- वंचना (Deprivation): धोखाधड़ी या देशद्रोह के आधार पर सरकार द्वारा नागरिकता छीन लेना।
भारतीय संविधान: उद्देशिका, विशेषताएँ एवं नागरिकता (Top 50 MCQs
प्रश्न 1: ‘भारत के संविधान की उद्देशिका’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: UPSC 2021, UPPSC 2023
(A) उद्देशिका संविधान का भाग है लेकिन इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं है।
(B) उद्देशिका संविधान का भाग नहीं है और इसका कोई कानूनी प्रभाव भी नहीं है।
(C) उद्देशिका संविधान का भाग है और इसका वही कानूनी प्रभाव है जो किसी अन्य भाग का है।
(D) उद्देशिका संविधान का भाग है लेकिन अन्य भागों से स्वतंत्र होकर इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं है।
उत्तर: (D) हल/व्याख्या: केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उद्देशिका संविधान का अंग है, परंतु इसे न्यायालय में स्वतंत्र रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 2: ‘भारत के संदर्भ में ‘धर्मनिरपेक्ष’ (पंथनिरपेक्ष) शब्द का सही भाव क्या है?’: UPSC 2020, RO/ARO 2021 (A) भारत में अनेक धर्म हैं।
(B) भारतीयों को धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है।
(C) धर्म का पालन करना व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर है।
(D) भारत में राज्य का कोई धर्म नहीं है।
उत्तर: (D) हल/व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुसार राज्य का अपना कोई राजकीय धर्म नहीं है और वह सभी धर्मों को समान संरक्षण प्रदान करता है।
प्रश्न 3: ‘भारत के संविधान के भाग II (नागरिकता) के अंतर्गत संसद की शक्ति के संदर्भ में विचार कीजिए’: UPPSC 2024 (Prelims), UPSC 2022
(A) नागरिकता का अधिकार केवल जन्म के आधार पर दिया जा सकता है।
(B) संविधान नागरिकता के अर्जन और समाप्ति के लिए स्थायी प्रावधान करता है।
(C) संसद को नागरिकता के अधिकार को कानून द्वारा विनियमित करने की शक्ति है।
(D) नागरिकता के संबंध में कानून बनाने की शक्ति केवल राज्यों के पास है। उत्तर: (C) हल/व्याख्या: अनुच्छेद 11 संसद को यह अधिकार देता है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति के संबंध में कानून बनाए।
प्रश्न 4: ‘भारत के संविधान की निम्नलिखित में से कौन सी विशेषता यह संकेत देती है कि वास्तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद के पास है?’: UPSC 2023, BPSC 2022
(A) संघीय व्यवस्था
(B) प्रतिनिधित्व वाली न्यायपालिका
(C) संसदीय लोकतंत्र
(D) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
उत्तर: (C) हल/व्याख्या: संसदीय प्रणाली में राष्ट्रपति नाममात्र का प्रमुख होता है और वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद में निहित होती है।
प्रश्न 5: ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के संदर्भ में विचार करें, जिसे हाल ही में लागू किया गया है’: Current Affairs Static – UPSC 2025, UPPSC 2026 (Expected)
(A) यह केवल मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करता है।
(B) यह 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए 6 गैर-मुस्लिम समुदायों को नागरिकता का मार्ग प्रशस्त करता है। (C) यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है क्योंकि यह धर्म आधारित है।
(D) यह संविधान की छठी अनुसूची के क्षेत्रों पर भी लागू होता है।
उत्तर: (B) हल/व्याख्या: CAA 2019 के तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को नागरिकता देने का प्रावधान है।
प्रश्न 6: ‘केश्वानन्द भारती बनाम केरल राज्य (1973) मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय का महत्व क्या है?’: UPSC 2021, MPPCS 2024
(A) कार्यपालिका की शक्तियों को सीमित करना। (B) मौलिक अधिकारों को अनुल्लंघनीय घोषित करना।
(C) संविधान के ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) के सिद्धांत को प्रतिपादित करना।
(D) प्रस्तावना को संविधान से अलग करना।
उत्तर: (C) हल/व्याख्या: इस मामले में कोर्ट ने कहा कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है लेकिन उसके ‘मूल ढांचे’ को नष्ट नहीं कर सकती।
प्रश्न 7: ‘भारतीय संविधान की उद्देशिका में ‘स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व’ के आदर्श कहाँ से लिए गए हैं?’: UPPSC 2022, RO/ARO 2023
(A) अमेरिकी क्रांति
(B) फ्रांसीसी क्रांति
(C) रूसी क्रांति
(D) आयरिश संविधान
उत्तर: (B) हल/व्याख्या: 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से ‘स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व’ के नारे को भारतीय संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया गया।
प्रश्न 8: ‘दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा भारत के लिए सही है?’: UPSC 2022, UPPSC 2025
(A) भारत में केंद्र और राज्य दोनों की नागरिकता होती है।
(B) भारत केवल एकल नागरिकता प्रदान करता है।
(C) ओसीआई (OCI) कार्ड धारकों को पूर्ण नागरिक माना जाता है।
(D) नागरिकता का विषय समवर्ती सूची का हिस्सा है।
उत्तर: (B) हल/व्याख्या: भारत में संघवाद के बावजूद राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए केवल ‘एकल नागरिकता’ (Single Citizenship) का प्रावधान है।
प्रश्न 21: (कथन-कारण) ‘भारतीय नागरिकता की समाप्ति के संदर्भ में निम्न पर विचार करें’: UPSC 2021, UPPSC 2024
कथन (A): यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता स्वीकार करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।
कारण (R): भारतीय संविधान एक साथ दो देशों की नागरिकता (Dual Citizenship) रखने की अनुमति नहीं देता है।
(A) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(B) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(C) (A) सही है, पर (R) गलत है।
(D) (A) गलत है, पर (R) सही है।
उत्तर: (A)
हल/व्याख्या: अनुच्छेद 9 के तहत एकल नागरिकता का सिद्धांत है। विदेशी नागरिकता लेते ही भारतीय नागरिकता का अंत हो जाता है।
प्रश्न 22: (मिलान करें) ‘संविधान की विशेषताओं और उनके स्रोत के सही युग्म को चुनें’: BPSC 2023, MPPCS 2022
सूची I (विशेषता) | सूची II (स्रोत)
- प्रस्तावना की भाषा | (i) ब्रिटेन
- एकल नागरिकता | (ii) ऑस्ट्रेलिया
- गणतंत्रात्मक ढांचा | (iii) कनाडा
- सशक्त केंद्र के साथ संघ | (iv) फ्रांस
विकल्प:
(A) 1-(ii), 2-(i), 3-(iv), 4-(iii)
(B) 1-(i), 2-(ii), 3-(iii), 4-(iv)
(C) 1-(iii), 2-(iv), 3-(i), 4-(ii)
(D) 1-(iv), 2-(iii), 3-(ii), 4-(i)
उत्तर: (A)
हल/व्याख्या: प्रस्तावना की भाषा ऑस्ट्रेलिया से, एकल नागरिकता ब्रिटेन से, गणतंत्र फ्रांस से और संघीय ढांचा कनाडा से लिया गया है।
प्रश्न 23: (कथन निष्कर्ष) ‘प्रस्तावना में “न्याय” के आदर्शों के संदर्भ में’: UPSC 2020, RAS 2024
कथन 1: प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के तत्व रूसी क्रांति (1917) से लिए गए हैं।
कथन 2: आर्थिक न्याय का अर्थ है कि केवल धन के आधार पर भेदभाव का अभाव।
निष्कर्ष:
(A) केवल कथन 1 सही है।
(B) केवल कथन 2 सही है।
(C) 1 और 2 दोनों सही हैं।
(D) न तो 1 और न ही 2 सही है।
उत्तर: (A)
हल/व्याख्या: कथन 2 गलत है क्योंकि आर्थिक न्याय का अर्थ संपदा, आय और संपत्ति की असमानता को दूर करना भी है, न कि केवल भेदभाव का अभाव।
प्रश्न 24: (गद्यांश आधारित प्रश्न) नीचे दिए गए अंश को पढ़ें: UPSC CSAT/GS 2023
“हम भारत के लोग… अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
प्रश्न: उपर्युक्त अंश के आधार पर भारतीय संविधान की शक्ति का अंतिम स्रोत क्या है?
(A) ब्रिटिश संसद
(B) भारत की संसद
(C) भारत की जनता
(D) संविधान सभा के सदस्य
उत्तर: (C)
हल/व्याख्या: “हम भारत के लोग” शब्द यह स्पष्ट करते हैं कि संविधान की शक्ति का मूल स्रोत भारत की जनता है।
प्रश्न 25: (बहु-कथनीय) ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 के संदर्भ में सत्य चुनें’: UPPSC 2025 (Expected), UPSC 2020
- यह कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों पर लागू होता है।
- इसमें 6 धार्मिक समुदायों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई) को शामिल किया गया है।
- यह कानून भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिना किसी अपवाद के लागू है।
कूट:
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (A)
हल/व्याख्या: कथन 3 गलत है क्योंकि यह कानून संविधान की 6वीं अनुसूची में शामिल जनजातीय क्षेत्रों और ‘इनर लाइन परमिट’ वाले क्षेत्रों में लागू नहीं होता।
प्रश्न 26: (मिलान) ‘उद्देशिका के शब्दों का सही क्रम पहचानें’: BPSC 2021, UPPSC 2023
(A) संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य
(B) समाजवादी, संप्रभु, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य
(C) पंथनिरपेक्ष, संप्रभु, समाजवादी, गणराज्य, लोकतंत्रात्मक
(D) संप्रभु, पंथनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य
उत्तर: (A)
हल/व्याख्या: प्रस्तावना में ‘Sovereign, Socialist, Secular, Democratic, Republic’ का यही संवैधानिक क्रम है।
प्रश्न 27: (कथन-कारण) ‘भारत की प्रकृति के संदर्भ में’: UPSC 2022
कथन (A): भारत एक ‘विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ’ है।
कारण (R): संसद को किसी भी राज्य की सीमा बदलने या नाम बदलने का अधिकार है, इसके लिए संबंधित राज्य की सहमति अनिवार्य नहीं है।
(A) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(B) (A) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु व्याख्या सही नहीं है।
(C) (A) सही है, (R) गलत है।
(D) (A) गलत है, (R) सही है।
उत्तर: (A)
हल/व्याख्या: अनुच्छेद 3 के तहत केंद्र राज्यों का पुनर्गठन कर सकता है, जिससे संघ की मजबूती बनी रहती है।
प्रश्न 28: (गद्यांश आधारित) ‘संविधान की सर्वोच्चता’:
“भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत लिखित संविधान है। यह न तो पूरी तरह लचीला है और न ही पूरी तरह कठोर, बल्कि दोनों का समन्वय है।”
प्रश्न: उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार ‘समन्वय’ का क्या अर्थ है?
(A) कुछ प्रावधान साधारण बहुमत से और कुछ विशेष बहुमत से संशोधित होते हैं।
(B) इसे कभी बदला नहीं जा सकता।
(C) केवल न्यायपालिका ही इसे बदल सकती है।
(D) राज्य सरकारें अपनी मर्जी से संशोधन कर सकती हैं।
उत्तर: (A)
हल/व्याख्या: अनुच्छेद 368 कठोरता और लचीलेपन के मिश्रण को दर्शाता है।