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भारतीय संविधान के स्रोत: किस देश से क्या लिया गया? Sources of the Indian Constitution

1. परिचय

भारतीय संविधान का निर्माण करते समय संविधान सभा ने भारत की ऐतिहासिक परिस्थितियों, स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों और विश्व के विभिन्न देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं का अध्ययन किया। संविधान निर्माताओं ने अनेक देशों से उपयोगी संवैधानिक सिद्धांतों और संस्थागत व्यवस्थाओं को अपनाया तथा उन्हें भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार ढाला।

भारतीय संविधान किसी एक विदेशी संविधान की नकल नहीं है। यह विभिन्न संवैधानिक परंपराओं, भारत शासन अधिनियम, 1935 और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित एक विस्तृत संवैधानिक दस्तावेज है।

UPSC, UPPCS, SSC, रेलवे तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि भारतीय संविधान का कौन-सा प्रावधान किस देश या ऐतिहासिक स्रोत से प्रभावित है।

2. भारतीय संविधान के प्रमुख स्रोत

भारतीय संविधान के स्रोतों को मुख्यतः दो वर्गों में समझा जा सकता है:

  1. भारत शासन अधिनियम, 1935 जैसे ऐतिहासिक और प्रशासनिक स्रोत।
  2. ब्रिटेन, अमेरिका, आयरलैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, जापान और दक्षिण अफ्रीका सहित विभिन्न देशों की संवैधानिक व्यवस्थाएँ।

इन स्रोतों से संबंधित प्रावधानों को भारतीय संविधान में अपनाते समय भारतीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया।

3. भारत शासन अधिनियम, 1935 से लिए गए प्रमुख प्रावधान

भारत शासन अधिनियम, 1935 भारतीय संविधान के प्रशासनिक और संघीय ढाँचे का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत था।

इससे प्रभावित प्रमुख व्यवस्थाओं में शामिल हैं:

  • संघीय ढाँचे से संबंधित कई प्रावधान।
  • राज्यपाल के पद और उससे संबंधित व्यवस्थाएँ।
  • लोक सेवा आयोगों से संबंधित प्रावधान।
  • आपातकालीन व्यवस्था से संबंधित कुछ प्रावधान।
  • प्रशासनिक संरचना और केंद्र-प्रांत संबंधों से जुड़े अनेक प्रावधान।

परीक्षा तथ्य: भारत शासन अधिनियम, 1935 को भारतीय संविधान के प्रमुख ऐतिहासिक स्रोतों में गिना जाता है। हालाँकि, संविधान के सभी प्रावधान इसी अधिनियम से नहीं लिए गए थे।

4. ब्रिटेन से प्रभावित प्रमुख विशेषताएँ

ब्रिटेन की संवैधानिक परंपरा ने भारतीय संसदीय शासन प्रणाली को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया।

प्रमुख विशेषताएँ:

  1. संसदीय शासन प्रणाली।
  2. मंत्रिमंडल प्रणाली।
  3. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार।
  4. लोकसभा अध्यक्ष के पद और संसदीय कार्यप्रणाली से संबंधित परंपराएँ।
  5. विधि के शासन की अवधारणा।
  6. एकल नागरिकता।
  7. संसदीय विशेषाधिकारों से संबंधित परंपराएँ।

भारत में संसदीय शासन प्रणाली के अंतर्गत मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। यह व्यवस्था कार्यपालिका को निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह बनाती है।

याद रखने की ट्रिक: ब्रिटेन = संसद, प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल, विधि का शासन और एकल नागरिकता।

5. अमेरिका से प्रभावित प्रमुख विशेषताएँ

अमेरिकी संविधान ने भारतीय संविधान के अधिकारों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं को प्रभावित किया।

प्रमुख विशेषताएँ:

  1. मौलिक अधिकारों की अवधारणा।
  2. न्यायिक पुनरावलोकन की व्यवस्था।
  3. न्यायपालिका की स्वतंत्रता से संबंधित विचार।
  4. राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया से संबंधित व्यवस्था।
  5. उपराष्ट्रपति के पद से संबंधित व्यवस्था।
  6. सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक भूमिका से जुड़े कुछ विचार।

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार भाग III में दिए गए हैं। न्यायिक पुनरावलोकन के माध्यम से न्यायालय कानूनों और सरकारी कार्रवाइयों की संवैधानिक वैधता की जाँच कर सकते हैं।

याद रखने की ट्रिक: अमेरिका = अधिकार, न्यायिक समीक्षा, महाभियोग और उपराष्ट्रपति।

6. आयरलैंड से प्रभावित प्रमुख विशेषताएँ

आयरलैंड के संविधान से भारतीय संविधान ने कुछ महत्वपूर्ण व्यवस्थाएँ ग्रहण कीं।

प्रमुख विशेषताएँ:

  1. राज्य के नीति-निदेशक तत्व।
  2. राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति से संबंधित कुछ विशेषताएँ।
  3. राज्यसभा में सदस्यों के नामांकन की व्यवस्था से संबंधित विचार।

राज्य के नीति-निदेशक तत्व संविधान के भाग IV में दिए गए हैं। इनका उद्देश्य राज्य को सामाजिक और आर्थिक कल्याण से जुड़ी नीतियाँ बनाने में मार्गदर्शन देना है।

याद रखने की ट्रिक: आयरलैंड = नीति-निदेशक तत्व।

7. कनाडा से प्रभावित प्रमुख विशेषताएँ

कनाडा की संवैधानिक व्यवस्था से भारतीय संघीय ढाँचे के कुछ महत्वपूर्ण पहलू प्रभावित हुए।

प्रमुख विशेषताएँ:

  1. मजबूत केंद्र वाली संघीय व्यवस्था।
  2. अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना।
  3. राज्यपाल की नियुक्ति से संबंधित व्यवस्था।
  4. सर्वोच्च न्यायालय की सलाहकारी भूमिका से संबंधित प्रावधान।

अवशिष्ट शक्तियाँ उन विषयों से संबंधित होती हैं जिनका स्पष्ट उल्लेख संघ सूची, राज्य सूची या समवर्ती सूची में नहीं होता। भारतीय संविधान में अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ संसद के पास हैं।

याद रखने की ट्रिक: कनाडा = मजबूत केंद्र और अवशिष्ट शक्तियाँ।

8. ऑस्ट्रेलिया से प्रभावित प्रमुख विशेषताएँ

ऑस्ट्रेलियाई संवैधानिक व्यवस्था से भारतीय संविधान में कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान प्रभावित हुए।

प्रमुख विशेषताएँ:

  1. समवर्ती सूची की व्यवस्था।
  2. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक से संबंधित व्यवस्था।
  3. व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता से संबंधित विचार।

समवर्ती सूची में ऐसे विषय शामिल होते हैं जिन पर संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं, संविधान के प्रावधानों के अधीन।

याद रखने की ट्रिक: ऑस्ट्रेलिया = समवर्ती सूची और संयुक्त बैठक।

9. फ्रांस से प्रभावित प्रमुख विशेषताएँ

फ्रांसीसी क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्शों को विश्वभर में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारतीय संविधान की उद्देशिका में स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्शों को स्थान दिया गया है। फ्रांसीसी गणतांत्रिक परंपरा भी भारतीय संवैधानिक विचारों के महत्वपूर्ण स्रोतों में गिनी जाती है।

याद रखने की ट्रिक: फ्रांस = स्वतंत्रता, समानता और बंधुता।

10. पूर्व सोवियत संघ से प्रभावित प्रमुख विशेषताएँ

पूर्व सोवियत संघ की संवैधानिक परंपरा से भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों के विचार को प्रभावित माना जाता है।

भारत में मौलिक कर्तव्य 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए। वर्तमान में संविधान के अनुच्छेद 51A के अंतर्गत 11 मौलिक कर्तव्य हैं।

मौलिक कर्तव्यों में संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान, राष्ट्रीय एकता की रक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे दायित्व शामिल हैं।

याद रखने की ट्रिक: सोवियत संघ = मौलिक कर्तव्य।

11. जर्मनी के वाइमर संविधान से प्रभावित प्रावधान

जर्मनी के वाइमर संविधान से आपातकालीन परिस्थितियों में अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित विचारों को भारतीय संविधान के ऐतिहासिक स्रोतों में शामिल किया जाता है।

भारत में आपातकालीन प्रावधान संविधान के भाग XVIII में दिए गए हैं। राष्ट्रीय आपातकाल से संबंधित प्रमुख प्रावधान अनुच्छेद 352 में है।

आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग संविधान में निर्धारित शर्तों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाना चाहिए।

याद रखने की ट्रिक: जर्मनी = आपातकालीन प्रावधानों से संबंधित प्रभाव।

12. जापान से प्रभावित प्रमुख विशेषता

जापान के संविधान से भारतीय संविधान में “विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया” की अवधारणा को प्रभावित माना जाता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रावधान है कि किसी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है।

हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने मेनका गांधी मामले, 1978 में अनुच्छेद 21 की व्याख्या करते हुए प्रक्रिया के न्यायसंगत, उचित और तर्कसंगत होने पर बल दिया।

याद रखने की ट्रिक: जापान = विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया।

13. दक्षिण अफ्रीका से प्रभावित प्रमुख विशेषताएँ

दक्षिण अफ्रीका की संवैधानिक व्यवस्था से भारतीय संविधान में कुछ प्रक्रियात्मक प्रावधान प्रभावित हुए।

प्रमुख विशेषताएँ:

  1. संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित कुछ व्यवस्थाएँ।
  2. राज्यसभा के सदस्यों के निर्वाचन की पद्धति से संबंधित कुछ विशेषताएँ।

भारत में संविधान संशोधन के लिए विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाएँ निर्धारित हैं। कुछ संशोधनों के लिए विशेष बहुमत आवश्यक होता है, जबकि कुछ संघीय प्रावधानों में राज्यों की स्वीकृति भी जरूरी होती है।

याद रखने की ट्रिक: दक्षिण अफ्रीका = संविधान संशोधन और राज्यसभा निर्वाचन।

14. विभिन्न स्रोतों की तुलनात्मक तालिका

स्रोतप्रमुख प्रभावित प्रावधान
भारत शासन अधिनियम, 1935प्रशासनिक ढाँचा, राज्यपाल और कई संघीय प्रावधान
ब्रिटेनसंसदीय शासन, मंत्रिमंडल प्रणाली, विधि का शासन, एकल नागरिकता
अमेरिकामौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, महाभियोग, उपराष्ट्रपति
आयरलैंडराज्य के नीति-निदेशक तत्व
कनाडामजबूत केंद्र, अवशिष्ट शक्तियाँ
ऑस्ट्रेलियासमवर्ती सूची, संयुक्त बैठक
फ्रांसस्वतंत्रता, समानता, बंधुता
पूर्व सोवियत संघमौलिक कर्तव्य
जर्मनी का वाइमर संविधानआपातकालीन प्रावधानों से संबंधित प्रभाव
जापानविधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया
दक्षिण अफ्रीकासंविधान संशोधन प्रक्रिया और राज्यसभा निर्वाचन से संबंधित विशेषताएँ

ध्यान दें: यह तालिका परीक्षा में प्रचलित स्रोत-विशेषता संबंधों का सार है। कुछ संवैधानिक प्रावधानों के ऐतिहासिक स्रोतों की व्याख्या अलग-अलग पाठ्यसामग्रियों में थोड़ी भिन्न हो सकती है।

15. भारतीय संविधान को विभिन्न स्रोतों से प्रभावित क्यों किया गया?

संविधान निर्माताओं के सामने स्वतंत्र भारत के लिए ऐसी शासन व्यवस्था बनाने की चुनौती थी जो लोकतांत्रिक, स्थिर और भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल हो।

विभिन्न संवैधानिक व्यवस्थाओं का अध्ययन करने से उन्हें संसदीय उत्तरदायित्व, अधिकारों की रक्षा, संघीय शासन, न्यायिक स्वतंत्रता और सामाजिक कल्याण जैसे विषयों पर उपलब्ध अनुभवों से सीखने का अवसर मिला।

विदेशी स्रोतों से प्रेरणा लेने का अर्थ उनकी व्यवस्थाओं की हूबहू नकल करना नहीं था। भारतीय संविधान सभा ने कई प्रावधानों को भारतीय इतिहास, सामाजिक विविधता और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया।

16. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारत शासन अधिनियम, 1935 — प्रशासनिक और संघीय ढाँचे का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत।
  • ब्रिटेन — संसदीय शासन प्रणाली।
  • अमेरिका — मौलिक अधिकार और न्यायिक पुनरावलोकन।
  • आयरलैंड — राज्य के नीति-निदेशक तत्व।
  • कनाडा — मजबूत केंद्र और अवशिष्ट शक्तियाँ।
  • ऑस्ट्रेलिया — समवर्ती सूची।
  • फ्रांस — स्वतंत्रता, समानता और बंधुता।
  • पूर्व सोवियत संघ — मौलिक कर्तव्य।
  • जापान — विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया।
  • दक्षिण अफ्रीका — संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित प्रभाव।
  • जर्मनी का वाइमर संविधान — आपातकालीन प्रावधानों से संबंधित प्रभाव।

अभ्यास प्रश्नावली — UPSC/UPPCS स्तर

भारतीय संविधान के स्रोत पर 20 कठिन प्रश्न

प्रश्न 1. भारतीय संविधान के स्रोतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. भारत शासन अधिनियम, 1935 भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है।
  2. भारतीय संविधान के सभी प्रावधान केवल एक विदेशी संविधान से लिए गए हैं।
  3. संविधान निर्माताओं ने विभिन्न संवैधानिक व्यवस्थाओं का अध्ययन किया था।

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1 और 3
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (B) केवल 1 और 3।

व्याख्या: भारतीय संविधान अनेक ऐतिहासिक और विदेशी स्रोतों से प्रभावित है। इसे किसी एक विदेशी संविधान की नकल नहीं माना जा सकता।

प्रश्न 2. भारतीय संविधान में संसदीय शासन प्रणाली मुख्यतः किस देश से प्रभावित है?

(A) अमेरिका
(B) ब्रिटेन
(C) जापान
(D) फ्रांस

सही उत्तर: (B) ब्रिटेन।

व्याख्या: भारत की संसदीय शासन प्रणाली ब्रिटिश संवैधानिक परंपरा से प्रभावित है। इसमें मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।

प्रश्न 3. राज्य के नीति-निदेशक तत्व किस देश के संविधान से प्रभावित माने जाते हैं?

(A) आयरलैंड
(B) अमेरिका
(C) कनाडा
(D) जापान

सही उत्तर: (A) आयरलैंड।

व्याख्या: भारतीय संविधान के भाग IV में दिए गए राज्य के नीति-निदेशक तत्व आयरिश संविधान से प्रभावित माने जाते हैं।

प्रश्न 4. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए।

  1. अमेरिका — मौलिक अधिकार
  2. आयरलैंड — नीति-निदेशक तत्व
  3. ऑस्ट्रेलिया — समवर्ती सूची
  4. जापान — विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4

सही उत्तर: (D) 1, 2, 3 और 4।

व्याख्या: चारों युग्म भारतीय संविधान के स्रोतों से संबंधित प्रचलित परीक्षा-आधारित मिलान हैं।

प्रश्न 5. भारतीय संविधान में अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ किसके पास हैं?

(A) केवल राज्य विधानमंडलों के पास
(B) संसद के पास
(C) केवल सर्वोच्च न्यायालय के पास
(D) निर्वाचन आयोग के पास

सही उत्तर: (B) संसद के पास।

व्याख्या: भारतीय संविधान में अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ संसद में निहित हैं। यह व्यवस्था मजबूत केंद्र वाली संघीय संरचना से संबंधित है।

प्रश्न 6. कथन और कारण पर विचार कीजिए।

कथन (A): भारत का संविधान विभिन्न संवैधानिक स्रोतों से प्रभावित है।

कारण (R): संविधान निर्माताओं ने विभिन्न देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं का अध्ययन कर भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार प्रावधान अपनाए।

(A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(C) A सही है, R गलत है।
(D) A गलत है, R सही है।

सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

व्याख्या: भारतीय संविधान का निर्माण विभिन्न संवैधानिक अनुभवों और भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया।

प्रश्न 7. भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों का विचार किस स्रोत से प्रभावित माना जाता है?

(A) ब्रिटेन
(B) पूर्व सोवियत संघ
(C) कनाडा
(D) आयरलैंड

सही उत्तर: (B) पूर्व सोवियत संघ।

व्याख्या: मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा को पूर्व सोवियत संघ की संवैधानिक परंपरा से प्रभावित माना जाता है। भारत में इन्हें 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया।

प्रश्न 8. भारतीय संविधान की समवर्ती सूची किस देश से प्रभावित है?

(A) ऑस्ट्रेलिया
(B) जापान
(C) फ्रांस
(D) जर्मनी

सही उत्तर: (A) ऑस्ट्रेलिया।

व्याख्या: समवर्ती सूची ऑस्ट्रेलियाई संवैधानिक व्यवस्था से प्रभावित मानी जाती है। इसमें संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं, संविधान के अधीन।

प्रश्न 9. स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्श किस ऐतिहासिक परंपरा से जुड़े हैं?

(A) रूसी क्रांति
(B) फ्रांसीसी क्रांति
(C) औद्योगिक क्रांति
(D) अमेरिकी गृहयुद्ध

सही उत्तर: (B) फ्रांसीसी क्रांति।

व्याख्या: स्वतंत्रता, समानता और बंधुता फ्रांसीसी क्रांति से जुड़े प्रमुख आदर्श हैं। भारतीय संविधान की उद्देशिका में भी इन मूल्यों को स्थान दिया गया है।

प्रश्न 10. “विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया” की अवधारणा किस देश से प्रभावित मानी जाती है?

(A) ब्रिटेन
(B) कनाडा
(C) जापान
(D) ऑस्ट्रेलिया

सही उत्तर: (C) जापान।

व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया का उल्लेख है। इस अवधारणा का स्रोत जापानी संविधान माना जाता है।

प्रश्न 11. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म गलत सुमेलित है?

(A) ब्रिटेन — संसदीय शासन प्रणाली
(B) आयरलैंड — नीति-निदेशक तत्व
(C) जापान — विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया
(D) ऑस्ट्रेलिया — मौलिक कर्तव्य

सही उत्तर: (D) ऑस्ट्रेलिया — मौलिक कर्तव्य।

व्याख्या: मौलिक कर्तव्य पूर्व सोवियत संघ की संवैधानिक परंपरा से प्रभावित माने जाते हैं, जबकि समवर्ती सूची ऑस्ट्रेलिया से संबंधित है।

प्रश्न 12. संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित प्रमुख विदेशी स्रोत कौन-सा है?

(A) दक्षिण अफ्रीका
(B) जापान
(C) फ्रांस
(D) जर्मनी

सही उत्तर: (A) दक्षिण अफ्रीका।

व्याख्या: संविधान संशोधन प्रक्रिया के कुछ पहलुओं और राज्यसभा के सदस्यों के निर्वाचन की पद्धति को दक्षिण अफ्रीका की संवैधानिक व्यवस्था से प्रभावित माना जाता है।

प्रश्न 13. भारत में मजबूत केंद्र वाली संघीय व्यवस्था का प्रमुख विदेशी स्रोत किस देश को माना जाता है?

(A) कनाडा
(B) जापान
(C) फ्रांस
(D) आयरलैंड

सही उत्तर: (A) कनाडा।

व्याख्या: कनाडा से मजबूत केंद्र वाली संघीय व्यवस्था और अवशिष्ट शक्तियों के केंद्र में निहित होने जैसी विशेषताएँ प्रभावित मानी जाती हैं।

प्रश्न 14. गद्यांश पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।

भारतीय संविधान में संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है। इसके बावजूद कुछ विषयों पर केंद्र को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ संसद में निहित हैं और कुछ परिस्थितियों में केंद्र की भूमिका बढ़ सकती है।

गद्यांश किस विशेषता की ओर संकेत करता है?

(A) पूर्णतः एकात्मक शासन
(B) मजबूत केंद्र वाली संघीय व्यवस्था
(C) राज्यों की पूर्ण संप्रभुता
(D) न्यायपालिका का उन्मूलन

सही उत्तर: (B) मजबूत केंद्र वाली संघीय व्यवस्था।

व्याख्या: भारत में संघीय ढाँचे के साथ मजबूत केंद्र की विशेषताएँ भी हैं। अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ संसद में निहित होना इसका एक उदाहरण है।

प्रश्न 15. भारतीय संविधान में आपातकालीन प्रावधानों पर किस विदेशी संवैधानिक परंपरा का प्रभाव माना जाता है?

(A) फ्रांस
(B) जर्मनी का वाइमर संविधान
(C) आयरलैंड
(D) जापान

सही उत्तर: (B) जर्मनी का वाइमर संविधान।

व्याख्या: आपातकालीन परिस्थितियों में अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित विचारों के लिए जर्मनी के वाइमर संविधान को ऐतिहासिक स्रोतों में गिना जाता है।

प्रश्न 16. भारत शासन अधिनियम, 1935 का महत्व किस कारण है?

(A) इसने भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को पूर्ण रूप से स्थापित किया।
(B) यह भारतीय संविधान के प्रशासनिक और संघीय ढाँचे का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत था।
(C) इसने भारतीय संविधान की उद्देशिका लिखी।
(D) इसने भारत को 1950 में गणराज्य घोषित किया।

सही उत्तर: (B) यह भारतीय संविधान के प्रशासनिक और संघीय ढाँचे का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत था।

व्याख्या: भारत शासन अधिनियम, 1935 ने प्रशासनिक व्यवस्था और कई संघीय प्रावधानों को प्रभावित किया। भारतीय संविधान ने इसके कई पहलुओं को नई संवैधानिक व्यवस्था में ढाला।

प्रश्न 17. कथन और कारण पर विचार कीजिए।

कथन (A): भारतीय संविधान को केवल विदेशी संविधानों की नकल कहना उचित नहीं है।

कारण (R): संविधान निर्माताओं ने विभिन्न स्रोतों से प्रभावित प्रावधानों को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया और व्यवस्थित किया।

(A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(C) A सही है, R गलत है।
(D) A गलत है, R सही है।

सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

व्याख्या: भारतीय संविधान में विभिन्न स्रोतों से प्रेरणा ली गई, लेकिन उन्हें भारतीय सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार अपनाया गया।

प्रश्न 18. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही है?

(A) अमेरिका — नीति-निदेशक तत्व
(B) आयरलैंड — मौलिक अधिकार
(C) ब्रिटेन — एकल नागरिकता
(D) जापान — समवर्ती सूची

सही उत्तर: (C) ब्रिटेन — एकल नागरिकता।

व्याख्या: एकल नागरिकता की व्यवस्था ब्रिटिश संवैधानिक परंपरा से प्रभावित मानी जाती है। नीति-निदेशक तत्व आयरलैंड और समवर्ती सूची ऑस्ट्रेलिया से प्रभावित मानी जाती है।

प्रश्न 19. भारतीय संविधान के स्रोतों को याद करने के लिए सबसे उपयोगी अध्ययन पद्धति कौन-सी है?

(A) केवल देशों के नाम याद करना, प्रावधानों को छोड़ देना।
(B) प्रत्येक देश के साथ जुड़े प्रमुख प्रावधानों का मिलान करना और प्रश्नों से अभ्यास करना।
(C) सभी विदेशी स्रोतों को एक ही देश से जोड़ देना।
(D) संविधान के प्रावधानों का अध्ययन न करना।

सही उत्तर: (B) प्रत्येक देश के साथ जुड़े प्रमुख प्रावधानों का मिलान करना और प्रश्नों से अभ्यास करना।

व्याख्या: प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर देश और उससे प्रभावित संवैधानिक विशेषता का मिलान पूछा जाता है। इसलिए तुलनात्मक तालिका, पुनरावृत्ति और MCQ अभ्यास उपयोगी हैं।

प्रश्न 20. भारतीय संविधान के स्रोतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. ब्रिटेन से संसदीय शासन प्रणाली प्रभावित मानी जाती है।
  2. अमेरिका से मौलिक अधिकार और न्यायिक पुनरावलोकन प्रभावित माने जाते हैं।
  3. आयरलैंड से राज्य के नीति-निदेशक तत्व प्रभावित माने जाते हैं।
  4. जापान से समवर्ती सूची प्रभावित मानी जाती है।

सही उत्तर चुनिए।

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1, 2 और 3
(C) केवल 2, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4

सही उत्तर: (B) केवल 1, 2 और 3।

व्याख्या: पहले तीन कथन सही हैं। समवर्ती सूची ऑस्ट्रेलिया से प्रभावित मानी जाती है, जापान से नहीं।


अध्याय का निष्कर्ष

भारतीय संविधान के स्रोतों का अध्ययन संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसकी संस्थागत संरचना को समझने में सहायता करता है। ब्रिटेन से संसदीय शासन प्रणाली, अमेरिका से मौलिक अधिकार और न्यायिक पुनरावलोकन, आयरलैंड से नीति-निदेशक तत्व, कनाडा से मजबूत केंद्र वाली संघीय व्यवस्था और ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची जैसी विशेषताएँ प्रभावित मानी जाती हैं।

भारतीय संविधान की विशिष्टता इस बात में है कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त विचारों को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाया गया। इसलिए संविधान के स्रोतों का अध्ययन करते समय केवल देशों के नाम याद करना पर्याप्त नहीं है; उनसे जुड़े प्रावधानों का अर्थ और महत्व समझना भी आवश्यक है।

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